सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में कथित तौर पर लिप्त लोगों के घरों को ध्वस्त करने की भाजपा सरकारों की ‘बुलडोजर निति’ की कड़ी निंदा की है। कोर्ट ने कहा कि कानून के शासन में बुलडोजर निति पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यदि इसकी अनुमति दी गई तो अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति के अधिकार की संवैधानिक मान्यता समाप्त हो जाएगी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने एक पत्र याचिका पर मंगलवार को सुनाए फैसले में यह टिप्पणियां की।
सीजेआई चंद्रचूड़ के रविवार को रिटायर होने से पहले शनिवार को इस मामले का विस्तृत फैसला शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। सीजेआई चंद्रचूड़ के लिखे फैसले में कहा गया है कि बुलडोजर के माध्यम से सरकार के किसी भी अंग या अधिकारी द्वारा मनमानी और गैरकानूनी व्यवहार की अनुमति दी जाती है, तो नागरिकों की संपत्तियों को बाहरी कारणों से चुनिंदा प्रतिशोध के रूप में ध्वस्त कर दिया जाएगा। नागरिकों की आवाज को बुलडोजर की धमकी देकर नहीं दबाया जा सकता।