पिरान कलियर, उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में स्थित एक नगर पंचायत है, जहां की अधिकतम आबादी सुन्नी मुसलमानों की है। शिया मुसलमानों की संख्या यहां कम है, लेकिन वे अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। हाल ही में, मोहर्रम के त्यौहार को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, जब कुछ तथाकथित सुन्नी मुस्लिम नेताओं ने शिया समुदाय को उनके तरीके से मोहर्रम मनाने से रोकने के लिए उप जिलाधिकारी रुड़की को आवेदन दिया।
पीरान कलियर से सभासद एडवोकेट दानिश साबरी ने कहा कि यह घटना धार्मिक असहिष्णुता का स्पष्ट उदाहरण है। सुन्नी नेताओं का यह रवैया भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे नेताओं की तुलना उन तथाकथित गौ रक्षकों से की जा सकती है, जो गायों की रक्षा के नाम पर मुसलमानों को मारते हैं और अपनी दबंगई दिखाते हैं। हर कोई अपने स्तर तक कट्टर है, तो क्यों केवल गौ रक्षकों को बुरा कहा जाए? हर वह व्यक्ति जो अपने यहाँ रहने वाली अल्पसंख्यक आबादी पर अपना जोर दिखाकर अपने कानून उन पर लादता है, वह भी उन तथाकथित गौ रक्षकों की तरह कट्टर ही है।
पिछले वर्ष भी कुछ तथाकथित नेताओं ने सुन्नी बच्चों के परचम ले जाने पर रोक लगवाई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन नेताओं को शिया या सुन्नियों से कोई मतलब नहीं है, बल्कि इन्हें अपने वर्चस्व से मतलब है।
धार्मिक सहिष्णुता और परस्पर सम्मान का समाज में होना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी धार्मिक समूह को दूसरे समूह की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। प्रशासन और समाज दोनों मिलकर ऐसी घटनाओं पर सख्ती से निपटें और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करें। धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ खड़ा होना और सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।