इमाम सादिक़ अलै. ने फ़रमाया "ऐ अल्लाह उन आँखों पर रहमत नाज़िल फ़रमा जो हमारे मसाएब पर रोती हैं, ऐ अल्लाह उन दिलों पर रहमत कर जो हमारी मुसीबत में निढाल होते और हमारे लिए कुढ़ते और जलते हैं। ऐ अल्लाह उन चीख़ों पर रहमत फ़रमा जो हमारे लिए बुलंद होती हैं।
(बिहारुल अनवार: जि.98/पेज8)