इस्राईली मीडिया ने इस यात्रा की समीक्षा करते हुए लिखा है कि यह रणनीतिक यात्रा, इस्लामी प्रतिरोध की जीत और ज़ायोनी शासन के लिए एक बड़ी हार है।
मिलिट्री इंटेलिजेंस रिसर्च डिवीज़न के प्रमुख के रूप में सेवा करने वाले एक रिटायर्ड इस्राईली जनरल अमोस गिलियड ने एक रेडियो साक्षात्कार में कहा कि ईरानियों को अब लगने लगा है कि इस्राईल, कमज़ोर पड़ गया है।
इस्राईली अख़बार यदिओत अहारनोत में भी एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने लिखा है कि इस यात्रा से सिद्ध हो गया कि इस्राईल के हाथ से अवसर अब निकल गया है।
अख़बार लिखता हैः मौक़ा अब चूक गया है, आज ईरानी राष्ट्रपति सीरिया का दौरा कर रहे हैं। ग़ज्ज़ा के ख़िलाफ़ एक बड़ी प्रतिक्रिया न केवल ज़रूरत थी, बल्कि उत्तरी मोर्चे पर होने वाले नुक़सान की बहाली का एक सुनहरा मौक़ा था, लेकिन मौक़ा हाथ से निकल गया, जिसका मतलब है कि रणनीति सोच समझकर नहीं बनाई गई।
ग़ौरतलब है कि ईरानी राष्ट्रपति ने सीरिया की अपनी यात्रा से एक दिन पहले अल-मयादीन टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा था कि उनकी दमिश्क़ यात्रा से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और महत्वपूर्ण साझेदारी विकसित करने में मदद मिलेगी। msm
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