1 मई 2023 - 14:10
अमेरिका और ब्रिटेन यूक्रेन जंग को लंबा खींचना चाहते हैं

अमेरिका के विश्व विख्यात फिलॉस्फर, स्कॉलर और विश्लेषक नोआम चोम्स्की ने रूस यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका और यूरोप की नीतियों पर जमकर सवाल उठाए।

अमेरिका के विश्व विख्यात फिलॉस्फर, स्कॉलर और विश्लेषक नोआम चोम्स्की ने रूस यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका और यूरोप की नीतियों पर जमकर सवाल उठाए। 

न्यू स्टेट्समैन वेबसाइट से बात करते हुए नोआम चोम्स्की ने यूक्रेन युद्ध की इराक युद्ध से तुलना करते हुए अमेरिका और ब्रिटेन की निगेटिव भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन इस युद्ध को लंबा खींचने की फ़िराक़ में हैं जबकि रूस अब तक सब्र और बर्दाश्त से काम लेता रहा है। 

उन्होंने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन बातचीत के ज़रिये यूक्रेन युद्ध का समाधान करने के पक्ष में नहीं हैं वह अपने फायदे के लिए इस जंग को लंबा खींचना चाहते हैं फिर चाहे यूक्रेन पूरी तरह बर्बाद ही क्यों न हो जाए। यूक्रेन सिर्फ एक मोहरा है जिसके पास न आज़ादी से कोई निर्णय लेने का हक़ है न ही अपनी मर्ज़ी से कुछ कर सकता है। 

नोआम ने कहा कि रूस ने अभी तक बहुत बर्दाश्त और सब्र से काम लिया है। उसने यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को भी कोई ख़ास नुकसान पहुँचाया न ही आम जान सेवा केंद्रों को निशाना बनाया। मास्को चाहता तो इराक पर अमेरिका के हमले की तरह ही यूक्रेन के खिलाफ प्रचलित हथियारों का इस्तेमाल करते हुए यूक्रेन को तहस नहस कर डालता और कीव को बगदाद की तरह ही खंडर में बदल देता और उसे रहने के क़ाबिल न छोड़ता। रूसी सेना पश्चिमी यूक्रेन में सप्लाई लाइन्स पर हमले करते हुए उन्हें तहस नहस कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि आप ज़्यादा कुछ नहीं सिर्फ इराक और यूक्रेन में मारे गए लोगों की तादाद पर नज़र डालिये तो मालूम हो कि UNO की रिपोर्ट के मुताबिक़ अब तक यूक्रेन में 8 हज़ार आम नागरिक मारे गए हैं जबकि इराक पर अमेरिका और ब्रिटेन के हमलो में UNO की रिपोर्ट के ही मुताबिक़ कम से कम 210 हज़ार लोग मारे गए। 

यूक्रेन रूस जंग शुरू होने के बाद से ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के नेताओं की कीव यात्रा खुद इस बात का सुबूत है कि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अभी तक सब्र और बर्दाश्त से काम लिया है। क्या इराक पर अमेरिका के हमले के वक़्त कोई बगदाद जा सकता था ? बिलकुल भी नहीं क्योंकि ब्रिटेन और अमेरिका जंग शुरू करते हैं तो उनका एक मक़सद क़त्ले आम, खून खराबा भी होता है। वह शहरों, आबादियों और बुनियादी ढांचे को बुरी तरह बर्बाद कर देते हैं और पूरे पूरे देश को तहस नहस कर देते हैं।