हुज्जतुल इस्लाम वलमुस्लेमीन मुहम्मद जवाद हाज अली अकबरी ने कहा कि ईरान के विरुद्ध 100 दिनों से अधिक दिनों तक कार्यवाही करने के साथ ही हर ओर से दबाव बनाते हुए शत्रु इसके परिणाम को वार्ता की मेज़ पर देखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि शत्रुओं ने कई षडयंत्र रचे थे।
अंत में छात्रों को विषाक्त करने और सन 1401 हिजरी शमसी वर्ष के अन्तिम बुधवार को काॅल देकर शत्रु अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहते थे। इसी के साथ एक शैतानी कूटनीति भी चल रही थी कि मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाकर ईरान को अलग-थलग कर दिया जाए। तेहरान के इमामे जुमा का कहना था कि हालांकि दुश्मनों की योजनाबंदी बहुत ठीक थी किंतु उनके समीकरण गड़बड़ा गए।
उन्होंने कहा कि इस साल प्रतिरोध के मोर्चे की स्थति बहुत अच्छी रही। सीरिया, अरब जगत में वापस हो गया। इराक़ में सरकार का गठन हुआ। फ़िलिस्तीनियों ने इस बार ज़ायोनियों को कड़ी चोट पहुंचाई। हिब्रु-अरबी मोर्चे के मुक़ाबले में लेबनान ने कड़ा प्रतिरोध किया जबकि सबसे अधिक क्षति अवैध ज़ायोनी शासन को उठानी पड़ी।
हाज अली अकबरी ने कहा कि वर्तमान समय में पश्चिम की हालत अच्छी नहीं है। यूक्रेन के जारी युद्ध ने बहुत सी प्रक्रियाओं को बुरी तरह से प्रभावित किया है। पश्चिम को आर्थिक संकट का सामना है जिसका कारण अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। हालांकि अमरीका अब ही अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है।
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