6 मार्च 2023 - 12:56
पाकिस्तान ने लगाई अमेरिका से मदद की गुहार, ईरान को 18 अरब डॉलर हर्जाना चुकाना पड़ेगा।

अमेरिका की ओर से लगाई गयी पाबंदियों के आगे सर झुकाते हुए पाकिस्तान ने ईरान से गैस लेने से तो इंकार कर दिया लेकिन ईरान के साथ गैस पाइपलाइन परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई तो पाकिस्तान को जुर्माना भरना पड़ सकता है।

अमेरिका के दबाव और पाबंदियों के आगे झुकना पाकिस्तान को भारी पद सकता है और अब ईरान से गैस पाइप लाइन समझौते के हर्जाने के रूप में उस पर 18 अरब डॉलर का जुर्माना लग सकता है। 

अमेरिका की ओर से लगाई गयी पाबंदियों के आगे सर झुकाते हुए पाकिस्तान ने ईरान से गैस लेने से तो इंकार कर दिया लेकिन ईरान के साथ गैस पाइपलाइन परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई तो पाकिस्तान को जुर्माना भरना पड़ सकता है। 

आर्थिक तंगी के बीच पाकिस्तान को एक और झटका लग सकता है. यहां ईरान का एक प्रोजेक्ट चल रहा था, जो एग्रीमेंट के मुताबिक तय समयसीमा में पूरा होना था. पाकिस्तान प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पा रहा है और इसके लिए ईरान उस पर 18 अरब डॉलर का जुर्माना लगा सकता है। 

पाकिस्तान संसद के पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) के सदस्यों ने स्पीकर नूर आलम खान से मुलाकात में बताया कि प्रोजेक्ट के लिए दी गई रकम में 332 अरब रुपए या चार अरब डॉलर का फंड जस का तस पड़ा है. पाकिस्तान ने फंड तीन प्रोजेक्ट के लिए उठाए थे, जिसमें गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट भी शामिल है. कमेटी के एक सदस्य सैयद हुसैन तारिक ने बताया कि फंड यूं ही पड़ा है और अगर समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता है तो ईरान जुर्माना लगा सकता है.

अमेरिका के आदेश पर ईरान से गैस लेने से इंकार करने वाले पाकिस्तान ने अमेरिका से गुहार लगाई है कि वह उसे इस मुसीबत से निकाले 

पाकिस्तान पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने पार्लियामेंट स्पीकर के साथ मुलाकात में कहा कि गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट के बारे में हमने अमेरिका को जानकारी दी है और राहत की गुहार लगाई है. उन्होंने बताया कि प्रतिबंधों की वजह से पाकिस्तान ईरान से गैस नहीं खरीद सकता. 

अगर ईरान फाइन भी लगाता है तो वो कितना होगा? इस सवाल के जवाब में एक अधिकारी ने एग्रीमेंट का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान पर 18 अरब डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि हम इस बारे में अमेरिका से बातचीत करेंगे और मांग करेंगे कि या तो अमेरिका प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने दे और प्रोजेक्ट को पूरा करने दे. और अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता है तो हम उनसे जुर्माने की रकम की मांग करेंगे.

ईरान गैस फील्ड से पाकिस्तान सीमा तक प्रोजेक्ट के अपने हिस्से को पहले ही पूरा कर चुका है। पड़ोसी देशों ईरान-पाकिस्तान के बीच यह समझौता 2009 में हुआ थी जब पाकिस्तान में पीपीपी की सरकार थी। समझौते के अनुसार, इस्लामाबाद 800 किमी लंबी पाइपलाइन का निर्माण करेगा लेकिन प्रोजेक्ट 13 साल से लगातार टलता ही जा रहा है।

समझौते के मुताबिक, ईरान 2024 तक देरी के चलते किसी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं जा सकता। साल 2019 में ईरान ने पाकिस्तान को आईपी गैसलाइन प्रोजेक्ट के तहत निर्धारित समय अवधि में पाकिस्तानी क्षेत्र में पाइपलाइन नहीं बिछाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी थी।

द न्यूज के अनुसार, ईरानी ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने पाकिस्तान को अपने क्षेत्र में 'ईरान-पाकिस्तान गैस लाइन प्रोजेक्ट' के एक हिस्से के निर्माण को पूरा करने के लिए फरवरी-मार्च 2024 तक का समय दिया है, अन्यथा उसे भारी भरकम जुर्माने का सामना करना होगा।

ग़ौर तलब है कि सालों पहले ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन करार हुआ था. शुरू में भारत भी इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट का हिस्सा था, लेकिन कुछ मुद्दों पर असहमति के कारण भारत ने इस प्रोजेक्ट से किनारा कर लिया था.