9 नवंबर 2022 - 20:08
बलूच साम्राज्यवादी शक्तियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में सबसे आगे रहे हैं, ईरानी संसद सभापति

ईरान के संसद सभापति ने कहा है कि अगर आप सीस्तान और बलूचिस्तान के इतिहास पर नज़र डालेंगे, तो पता चलेगा कि बलूच क़ौम ने हमेशा ईरान और देश की आज़ादी की रक्षा की है और यह लोग साम्राज्यवादी और अहंकारी शक्तियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में सबसे आगे रहे हैं।

कई कारकों ने लंबे समय से बलूच क़ौम को देश के अन्य लोगों के साथ जोड़कर रखा है, जो सीस्तान और बलूचिस्तान जैसे विशाल प्रांत में बसती है।

बलूच क़ौम के लोग आपस में भी इतनी शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं कि उनके बीच धार्मिक विश्वास या कोई दूसरी चीज़ कभी दीवार नहीं बनती है।

ईरान के सीस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में विभिन्न जातियां और क़बीले हैं। इन क़बीलों में शिया मुसलमान और सुन्नी मुसलमान दोनों पाए जाते हैं। इस प्रांत में कोई एक भी ऐसा क़बीला नहीं मिलेगा कि जिसके लोग या सिर्फ़ सुन्नी या शिया होंगे। हर क़बीले में शिया और सुन्नी दोनों मिल जायेंगे और उन्हें धर्म के आधार पर पहचानना भी मुश्किल होगा।

सीस्तान और बलूचिस्तान के शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच यह एकता और भाईचारा ईरान के दुश्मनों को खटकता रहा है। दुश्मन ने हमेशा यह प्रयास किया है कि वह इस प्रांत के लोगों के बीच फूट डाले और उन्हें आपस में लड़वाए।

बुधवार को ईरानी संसद सभापति मोहम्मद क़ालीबाफ़ ने संसद के खुले सत्र में इसी बिंदू की ओर संकेत करते हुए कहा कि दुश्मन ईरान को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। इस्लामी क्रांति के दुश्मन विशेष रूप से अमरीका और ज़ायोनी शासन की साज़िशों पर ईरानी राष्ट्र अपनी एकता और अखंडता से पानी फेर देगा। 

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