अमरीका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा कि मौजूद जानकारियों से हमें यक़ीन है कि ईरान ने विस्फोटक ड्रोन विमान के ज़रिए यह हमला किया है।
ब्रितानी विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने कहा कि ब्रिटेन इस हमले की निंदा करता है जिसमें एक ब्रितानी और एक रोमानियाई नागरिक की मौत हुई। ब्रिटेन के मूल्यांकन के अनुसार यह हमला संभावित रूप से ईरान ने किया है।
ईरान ने बार बार इन दावों और निराधार आरोपों का खंडन किया।
वियेना में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के लिए रूस के राजदूत मिख़ाईल औलियानोफ़ ने कहा कि इस मामले में अमरीका और ब्रिटेन के नैरेटिव में बड़ा विरोधाभास है। अमरीका कहता है कि उसे यक़ीन है कि यह हमला ईरान ने किया है और ब्रिटेन कहता है कि बहुत ज़्यादा संभावना इस बात की है कि यह हमला ईरान ने किया होगा। सवाल यह है कि इस विरोधाभास की क्या वजह है?
मर्सर स्ट्रीट पर हमले की घटना के कुछ ही दिन बाद एक अजीब ख़बर मीडिया में छा गई कि इमारात के तट के क़रीब चार जहाज़ों का कंट्रोल हाथ से निकल गया है और इन्हें हाईजैक कर लिया गया है। पश्चिमी और इस्राईली मीडिया ने फ़ौरन इस विषय में मनोवैज्ञानिक हमले शुरू कर दिए। कुछ घंटों बाद ख़बर आ गई कि हाई जैक की कोशिश नाकाम बना दी गई है।
लंदन में ईरान के दूतावास ने एक बयान में कहा कि पश्चिमी देश धोखा देने के लिए इस प्रकार की ख़बरें फैला रहे हैं।
ईरान के दूतावास ने एक बयान में कहा कि पश्चिमी देश धोखा देने के लिए इस प्रकार की ख़बरें फैला रहे हैं। हाज़ों का कंट्रोल हाथ से नसवाल यह है कि इस प्रकार की घटनाओं को लेकर ईरान को आरोपी ठहराने के पीछे पश्चिमी देशों और इस्राईल का मक़सद क्या है?
इसका एक मक़सद तो ईरान के आंतरिक हालात पर असर डालना है। इस समय ईरान में नई सरकार का गठन हुआ है और पश्चिमी सरकारों की पैनी नज़र ईरान पर लगी हुई है। दूसरी बात यह है कि वियेना में परमाणु वार्ता से भी ज़रूर इन अफ़वाहों का संबंध है। अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों के अधिकारियों के बयानों से यह लगता है कि उन्हें अब यक़ीन हो गया है कि परमाणु समझौता बहाल होने की उम्मीद कम है।
अमरीकियों की कोशिश है कि परमाणु समझौते में कुछ अनुच्छेद बढ़ जाएं ताकि ईरान की मिसाइल ताक़त और क्षेत्रीय पैठ को भी वह सीमित कर सकें मगर ईरान साफ़ कर चुका है कि इन विषयों के बारे में किसी से कोई बात नहीं होगी।
एक हक़ीक़त यह भी है कि पश्चिमी देशों और अमरीका को भी अब यह यक़ीन हो चुका है कि ईरान पर अधिकतम दबाव डालने की उनकी नीति कामयाब होने वाली नहीं है। इसलिए वह दबाव डालने के उद्देश्य से कुछ नए बहाने खोज रहे हैं।
यह लगता है कि पश्चिमी मोर्चा और इस्राईल की कोशिश है कि इस तरह का माहौल पैदा करें कि ईरान परमाणु समझौते से संबंधित वार्ताओं में पश्चिमी देशों की मांगें स्वीकार करने पर मजबूर हो जाए।
ईरान साफ़ कर चुका है कि इस तरह के नाटक से ईरान की नीतियों को बदला नहीं जा सकता।