प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के रौज़े के सुनहरे गुंबद की धुलाई और पवित्र रौज़े की साफ़ सफ़ाई की प्रक्रिया कई दिनों तक जारी रही और इसमें दर्जनों हुसैनी मतवालों ने भाग लिया।
मुहर्रम के दौरान हर साल लाखों की संख्या में मुसलमान दुनिया के कोने कोने से पवित्र नगर कर्बला पहुंचते हैं और सैयदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके निष्ठावान साथियों की याद में आयोजित होने वाली शोक सभाओं में शामिल होते हैं।
सन 61 हिजरी में पेश आने वाली हृदय विदारक घटना की याद मनाने का सिलसिला आज तक जारी है और समय गुज़रने के साथ साथ इसके जोश और प्रभाव में वृद्धि होती जा रही है।