बिन्यामिन नेतनयाहू के इस्राईल के प्रधान मंत्री के रूप में इस्राईल और फ़िलिस्तीनियों के बीच ईमानदारी के साथ बातचीत की संभावना पहले ही कम थी। अब नेफ़्ताली बेनेत के उदय से फ़िलिस्तीनी बुद्धिजीवियों के पास अधिक चिंतित होने का तर्क है।
ज़्यादातर लोगों को लगता है कि बेनेत, नेतनयाहू जैसे ही बुरे साबित होंगे, दूसरों का कहना है कि वह अवैध बस्तियों के निर्माण में विस्तार के अपने एजेन्डे को और ताक़त से बढ़ाएंगे।
बेनेत अतिग्रहित पूर्वी अलक़ुद्स सहित वेस्ट बैंक के ज़्यादातर हिस्सों को हथियाने और ज़ायोनी बस्तियों के निर्माण के कट्टर समर्थक हैं और वह फ़िलिस्तीन-इस्राईल तनाव के टू—स्टेट सलूशन के भी ख़िलाफ़ हैं।
नेतनयाहू ने जो ‘बीबी’ के नाम से जाने जाते हैं, पूर्वी अलक़ुद्स के भविष्य में फ़िलिस्तीनी स्टेट की संभावना को ख़त्म करने के लिए, ट्रम्प शासन के साथ मिल कर चाल चली, जब अमरीका ने तेल अबिब से अपना दूतावास अल-क़ुद्स पहुंचा दिया। यह वह शहर है जिसमें इस्लाम, यहूदी और ईसाई तीनों के तीर्थ स्थल हैं।
बेनेत जैसे कट्टर नेता का प्रधान मंत्री के पद पर पहुंचना ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है। ऐसा एमख़ैमर अबूसादा का मानना है जो ग़ज़्ज़ा पट्टी में अल-अज़हर यूनिवर्सिटी की राजनीति शास्त्र संकाय के प्रमुख व असोशिएट प्रोफ़ेसर हैं।
फ़िलिस्तीनी राष्ट्रीय पहल राजनैतिक दल के प्रमुख मुस्तफ़ा बरग़ूसी ने कहा है कि उन्हें लगता है कि फ़िलिस्तीनियों की नज़र से बेनेत, नेतनयाहू से ज़्यादा बुरे साबित होंगे।
बरग़ूसी ने ओस्लो समझौते में वेस्ट बैंक और पूर्वी अल-क़ुद्स को तीन भाग में बंटने का ज़िक्र करते हुए कहाः बेनेत, वेस्ट बैंक में एरिया-ए और एरिया-बी में फ़िलिस्तीनियों का समूह बनाने के समर्थक हैं जो बेस्ट बैंक का कुल 38 फ़ीसद एरिया है और बाक़ी बचे 62 फ़ीसदी एरिया को हड़पना चाहते हैं जो एरिया-सी कहलाता है।
एरिया सी में लगातार बस्तियों का निर्माण जारी रहने का मतलब, टू-स्टेट सलूशन की संभावना का ख़त्म होना। वह यक़ीनन नेतनयाहू से ज़्यादा बुरे हैं।
अनोखी सरकार
नेश्नल इंस्टीट्यूट फ़ॉर नेश्नल सेक्युरिटी के सीनियर फ़ेलो रिसर्च योएल गुज़ैन्सकी का कहना है कि यह गठबंधन कितना लंबा चलेगा और वह किस तरह के राजनैतिक प्लान की पेशकश करेगा, यह संदेह का विषय है।
गुज़ैन्सकी का कहना है कि नये प्रधान मंत्री के सामने अगली चुनौती इवीतार बस्ती की चौकी को ध्वस्त करने की होगी, जो वेस्ट बैंक के नाबलुस शहर के दक्षिण में बनी है। यह चौकी ख़ुद ज़ायोनी क़ानून के तहत भी अवैध है जिसे ध्वस्त होना है। अब देखना यह है कि बेनेत इसके बारे में क्या करते हैं। इसके अलावा नेगेव मरूस्थल में बद्दू बस्ती का भी मामला है। अगर वह इस बस्ती को उजाड़ते हैं तो उन्हें अरब घटक की ओर से मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
और ताक़त का सहारा
बेनेत का सबसे बड़ा विरोधी बाइडेन प्रशासन है, जो पहले ही अवैध बस्तियों का निर्माण रूकने की मांग कर चुका है। जल्द ही पूर्वी अल-क़ुद्स में फ़िलिस्तीनी काउंसलेट खुलने वाली है और इस्राईल पर शांति वार्ता की मेज़ पर लौटने के लिए दबाव भी पड़ने की संभावना है। हालांकि कुछ फ़िलिस्तीनी विचारक बाइडेन से उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन बरग़ूसी जैसों को डर है कि कहीं, बेनेत फ़िलिस्तीनी मुद्दे पर अमरीका की उदासीनता के बदले में ख़ामोश रह कर ईरान-अमरीका परमाणु समझौते की फिर से शुरूआत का समर्थन न कर दें।
पिछले महीने के टकराव के बाद से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध ने गति पकड़ ली है और कार्यकर्ताओं की नई पौध अपने घरों और पूर्वजों की ज़मीन की रक्षा के लिए ज़्यादा डटी हुयी नज़र आ रही है। बीबी हों या बेनेत, फ़िलिस्तीनियों का कहना है कि उनका प्रतिरोध जारी रहेगा।