विश्व क़ुद्स दिवस के अवसर पर सुप्रीम लीडर ने अपने भाषण में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधियों को संबोधित करते हुए कहाः अवैध शासन के ख़िलाफ़ अपने क़ानूनी और नैतिक प्रतिरोध को उस वक़्त तक जारी रखो, जब तक वह उसे स्वीकार करने पर मजबूर न हो जाए।
उन्होंने कहा कि दमनकारी पूंजीवादी व्यवस्था की नीतियों ने एक राष्ट्र को उसके घरों से निकाल दिया है और एक आतंकवादी शासन और विदेशी लोगों को वहां बसा दिया है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर का कहना था कि यूरोपीय लोगों का मानना है कि उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, यहूदियों पर अत्याचार किए हैं, लेकिन कहते हैं कि इसका बदला पश्चिम एशिया में एक राष्ट्र को उजाड़कर और उसका बर्बरतापूर्ण नरसंहार करके लिया जाना चाहिए, मानवाधिकारों और लोकतंत्र के बारे में उन्होंने अपने ही झूठे दावों का अपमान किया है।
उन्होंने कहा कि इस्राईल कोई एक देश नहीं, बल्कि फ़िलिस्तीनियों और अन्य मुस्लिम देशों के ख़िलाफ़ आतंकवादियों का एक अड्डा है, इसीलिए उसके ख़िलाफ़ प्रतिरोध, अत्याचार और आतंकवाद के ख़िलाफ़ प्रतिरोध करना सभी की ज़िम्मेदारी है।
ज़ायोनी शासन की स्थापना से पहले इस्लामी उम्माह में फूट डालने और उसे कमज़ोर करके फ़िलिस्तीन पर क़ब्ज़ा करने की साज़िश का उल्लेख करते हुए सुप्रीम लीडर ने कहाः उस समय, पूंजीवादी और साम्यवादी दोनों ख़ेमे ज़ायोनी तानाशाहों के साथ एकजुट हो गए थे, ब्रिटेन ने असली साज़िश रची, ज़ायोनी पूंजीपतियों ने पैसों और हथियारों के बल पर उसे अंजाम दिया, और सोवियत संघ पहली सरकार थी जिसने अवैध शासक को औपचारिकता प्रदान करके बड़ी संख्या में वहां यहूदियों को रवाना किया।
सुप्रीम लीडर का कहना था कि आज, विश्व में शक्ति का संतुलन इस्लामी जगत के पक्ष में है और अमरीकी चुनाव में वहां के अधिकारियों के अपमानित होने वाली घटनाएं, तथा कोरोना के मुक़ाबले में अमरीका और यूरोप की नाकामी, पश्चिम के पतन की निशानियां हैं।