अनातोली समाचार एजेन्सी के अनुसार पेंटागन के एक अधिकारी ने यह तो नहीं बताया कि इस बात से तुर्की को आधिकारिक रूप में किस प्रकार से सूचित किया गया किंतु इतना कहा कि अंकारा को आधिकारिक रूप से सूचित किया जा चुका है कि इस बारे में सन 2007 में होने वाले समझौते से तुर्की को निकाल दिया गया।
यह ख़बर एसी स्थिति में सामने आई है कि जब सन 2019 में घोषणा की गई थी कि रूस से मिसाइल सिस्टम एस-400 ख़रीदने के कारण अमरीका, एफ-35 युद्धक विमान कार्यक्रम से तुर्की को निकालना चाहता है। अब तुर्की को युद्धक विमान दिये जाने और पाइलेटों को प्रशिक्षण देने के काम को रोका जाता है।
याद रहे कि अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, डेनमार्क, आस्ट्रेलिया, इटली, हालैण्ड और नार्वे के साथ तुर्की एफ-35 युद्धक विमान बनाने के कार्यक्रम में शामिल रहा है। यह देश मिलकर इस युद्धक विमान के पुर्ज़े बनाते हैं। इन कलपुर्ज़ों को एसेंबल करके अमरीका के अलावा इटली और जापान में तीन प्रोडक्शन लाइनों पर एफ़-35 युद्धक विमान बनाए जाते हैं।