12 मार्च 2021 - 17:08
यूएन चार्टर को बचाने के लिए ईरान सहित 17 देश हुए एकजुट

ईरान सहित 17 देशों ने “यूएन चार्टर रक्षा मित्र गुट” के नाम से यूएन चार्टर को बचाने और एकपक्षीय कार्यवाहियों से निपटने की कोशिश शुरू की है।

अमरीका की पिछली ट्रम्प सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संधियों व संगठनों से निकल कर हालात को ऐसे धारे की ओर मोड़ दिया है जिससे सबसे अहम संगठन यूएन के वजूद पर ही सवाल उठने लगा।

यूएन चार्टर को बचाने का विचार पहली बार ईरान, रूस, क्यूबा, उत्तर कोरिया, वेनेज़ोएला, फ़िलिस्तीनी सरकार और सीरिया जैसे कुछ देश के ख़िलाफ़ अमरीका की एकपक्षीय कार्यवाही बढ़ने से सामने आया और फ़रवरी 2019 में वेनेज़ोएला के विदेश मंत्री ख़ोर्ख़े आराआसा ने, रूस, ईरान, सीरिया, चीन और फ़िलिस्तीन के दूतों के साथ गुट 77 के अध्यक्ष के रूप में, बोलिविया, अफ़्रीक़ी और एशियाई देशों के दूतों के साथ, सेक्युरिटी काउंसिल के सामने कहा थाः “आज हम यूएन के उसूलों के सम्मान के लिए इस संगठन के अहम सदस्यों पर आधारित एक गुट के वजूद में आने का एलान करते हैं। यह गुट यूएन चार्टर और सभी सदस्य देशों के अधिकारों को बचाने के लिए काम करेगा। सदस्य देशों की स्वाधीनता के अधिकार, अपने भविष्य के निर्धारण और बराबरी के अधिकार के सम्मान और शांतिपूर्ण तरीक़े से अंतर्राष्ट्रीय मतभेदों के हल पर बल देता है।”

ख़ोर्ख़े आराआसा ने कहाः हमारा मानना है कि इस उसूल का उल्लंघन हुआ है। शांति व सुरक्षा, जनता का अपने भविष्य के निर्धारण का अधिकार और मानवाधिकार को ख़तरा है। इस एलान के क़रीब दो साल बाद यूएन में अल्जीरिया, अंगोला, बेलारूस, बोलिविया, कम्बोडिया, चीन, क्यूबा, उत्तर कोरिया, एरिट्रिया, ईरान, लाओस, निकारागुआ, फ़िलिस्तीनी सरकार, रूस, सेंट विन्सेंट, सीरिया, वेनेज़ोएला के स्थायी प्रतिनिधि ने, यूएन के सदस्य देशों के स्थायी प्रतिनिधियों के नाम ख़त में, इस गुट की स्थापना का एलान किया।

इस ख़त में दूसरे देशों से भी इस गुट में शामिल होने की अपील की गयी है। इस ख़त में यूएन के वजूद में आने के उद्देश्य और उसके चार्टर के उल्लेख के साथ ही बल दिया गया है कि इस संगठन ने अपने पूरे इतिहास में, अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा व सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं जिसमें साम्राज्यवाद को ख़त्म करने, स्थायी अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास, बीमारियों को मिटाने और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में उसकी कोशिशें उल्लेखनीय हैं। इसके साथ ही इस बात का ज़िक्र भी ज़रूरी है कि इस क्षेत्र में उल्लंघन भी हुए हैं। इसके बावजूद, यूएन अभी भी बेहतरीन विकल्प है।

हमें चाहिए कि शांति व सहयोग से मानवता के सामने नई चुनौतियों व ख़तरों से निपटें। यूएन के तीन उद्देश्यों और हमारी जनता की इच्छाओं के व्यवहारिक होने, इसी तरह वैश्विक शांति और न्याय पर आधारित व्यवस्था क़ायम होने के लिए मुख्य तत्व, यूएन चार्टर में वर्णित उद्देश्यों की प्राप्ति व नियमों के पूरी तरह लागू होने की ओर से संतुष्टि का हासिल होना है। यह चार्टर देशों के बीच दोस्ताना संबंधों और सहयोग को बढ़ावा देता है जिससे विश्व समुदाय के लिए शांति, सुरक्षा, स्थिरता और विकास की गैरंटी मिलती है।