सैयद महमूद अलवी ने कहा कि अगर हम अमरीकी कार्यवाहियों को मनोवैज्ञानिक युद्ध समझें तो यह भोलापन होगा। अमरीका ईरान पर सैन्य हमला करने के बारे में गंभीरता के साथ सोच रहा था और आर्थिक युद्ध में अपनी पराजय पर इस तरह से पर्दा डालना चाहता था और हम यह बात अपने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कह रहे हैं। अमरीका के बी-52 बमवर्षक विमान 36 घंटे उड़ान भरते थे और विमान वाहक युद्धपोत को ईरान के हमले की रेंज से बाहर ले गये थे। यह सब इस लिए था ताकि ईरान के खिलाफ कार्यवाही की जाए।
ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री सैयद महमूद अलवी ने कहा कि इसी समय ईरान की सेना ने शक्ति प्रदर्शन किया जिसकी वजह से अमरीकी असमंजस में पड़ गये क्योंकि उनके युद्धक विमान जिस देश के हवाई अड्डे से उड़ान भर कर ईरान पर हमला करते, ईरान उस देश के प्रतिष्ठानों को मिट्टी के ढेर में बदल देता इस लिए वह किसी देश के हवाई अड्डे को इस्तेमाल नहीं कर पाए। इसके अलावा जब ईरान ने अमरीका के बेहद आधुनिक ड्रोन विमान, ग्लोबल हॉक को मार गिराया तो अमरीका की समझ में आ गया कि ईरान के आकाश उसके युद्धक विमानों के लिए सुरक्षित नहीं है।
ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री ने कहा कि अमरीकी हिन्द महासागर में जाकर यह समझ रहे थे कि हमारी रेंज से दूर हो गये लेकिन जब आईआरजीसी के युद्धाभ्यास में 1800 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद मोबाइल लक्ष्य को तबाह किया गया तो दुश्मनों की समझ में आ गया कि अगर उनके विमान वाहक युद्धपोत से ईरान पर मिसाइल दागा गया या युद्धक विमान ने उड़ान भरी तो उस पर मिसाइल से हमला किया जाएगा।
ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री ने बताया कि इलाक़े के कुछ देश हम से खुफिया रूप से संपर्क कर रहे हैं और संबंध बहाल करने की मांग कर रहे हैं और अब तक जो देश अमरीका को ईरान के साथ टकराने के लिए भड़का रहे थे अब अमरीका को सलाह दे रहे हैं कि ईरान के साथ समझौता कर ले और यह ईरान के प्रतिरोध, वरिष्ठ नेता के मार्गदर्शन और सेना की शक्ति की वजह से है।
इस्लामी गणंतत्र ईरान के इंटेलिजेंस मंत्री सैयद महमूद अलवी ने कहा कि हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वरिष्ठ नेता के फतवे में भी परमाणु हथियारों को हराम कहा गया है लेकिन अगर इस्लामी गणतंत्र ईरान को इस दिशा में ढकेला जाएगा तो फिर ईरान की गलती नहीं होगी हालांकि सामान्य परिस्थितियों में इस्लामी गणतंत्र ईरान का इस प्रकार का कोई इरादा या कार्यक्रम नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी की न केवल यह कि कोई जल्दी नहीं है बल्कि हमें उसका इंतेज़ार भी नहीं है क्योंकि प्रतिबंधों के साथ जीना और उन्हें प्रभावहीन करना हमने सीख लिया।