जो बाइडन ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की विदेश नीति की ओर इशारा करते हुए उसे तर्कहीन बताया और एक नए युग का वादा किया। जो बाइडन गुरुवार 4 फ़रवरी को अमेरिका के विदेश मंत्रालय पहुंचे और अपनी सरकार की विदेश नीति के बारे में पहला संबोधन दिया। बाइडन ने अपने भाषण में चीन और रूस के प्रति आक्रामक दृष्टिकोण का संकेत दिया तो वहीं म्यांमार की सेना से सैन्य शासन ख़त्म करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने यमन पर सऊदी हमलों का समर्थन बंद करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यमन में सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य अभियानों के लिए अपना समर्थन वापस ले रहा है। बाइडन ने कहा कि छह साल का युद्ध "समाप्त होना चाहिए" लेकिन साथ ही इस बात पर भी बल दिया कि, अमेरिका अपने पुराने सहयोगी सऊदी अरब का समर्थन करना जारी रखेगा।

बाइडन ने चीन और रूस के प्रति अपने भाषण में कहा, "अमेरिकी नेतृत्व को इस बढ़ती तानाशाही से सामना करना होगा, जिसमें चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा और लोकतंत्र को नुक़सान पहुंचाने और उसे बाधित करने का रूस का संकल्प शामिल है। उन्होंने कहा कि, हमें चुनौतियों का सामना करना होगा जिनमें महामारी, जलवायु संकट और परमाणु प्रसार शामिल हैं।" याद रहे कि, ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान टैरिफ़ बढ़ाए थे, जिसके चलते अमेरिका को एशियाई और यूरोपीय नेताओं की नाराज़गी का सामना करना पड़ा था और वैश्विक गठबंधन को नुक़सान भी पहुंचा था। ट्रम्प ने कुछ देशों में सत्तावाद को पीछे धकेलने के लिए बहुत ही कम काम किया था। 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर हुई हिंसा के बाद वैश्विक नेताओं ने अमेरिकी लोकतंत्र के स्वास्थ्य के बारे में संदेह व्यक्त किया था। कैपिटल हिल पर हुई हिंसा के लिए ट्रम्प पर अपने समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा है और गुरुवार को बाइडन का भाषण एक तरह की हुंकार भरने की कोशिश थी उन शंकाओं को दूर करने और अमेरिकियों को अपने देश के मूल्यों के प्रति समझाने के लिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, "हम कूटनीति में सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करते हैं क्योंकि निवेश करना है, बल्कि यह दुनिया के लिए सही है और हम ऐसा करते हैं। उन्होंने दावा किया कि, हम ऐसा शांति, सुरक्षा और ख़ुशहाली के साथ जीने के लिए करते हैं। हम अपने हित के लिए भी ऐसा करते हैं।" वैश्विक गठबंधन के बारे में बाइडन ने कहा कि, "अमेरिकी गठबंधन हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है और कूटनीति के साथ अग्रणी होने का मतलब है कि हमारे सहयोगियों और प्रमुख साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एक बार फिर चलना है।" इसी के साथ बाइडन ने कहा है कि अमेरिका यमन में सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य अभियानों के लिए अपना समर्थन वापस ले रहा है। बाइडन के मुताबिक़ छह साल से जारी युद्ध को समाप्त होना चाहिए लेकिन इस बात पर भी बल दिया कि, अमेरिका अपने पुराने सहयोगी सऊदी अरब का समर्थन करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि, "यमन में युद्ध ने मानवीय और सामरिक तबाही मचाई है और हम यमन में युद्ध को समाप्त करने के लिए अपनी कूटनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।" बाइडन ने कहा,"इस युद्ध में हम यमन में हथियारों की बिक्री समेत सभी अमेरिकी सहयोग को बंद कर रहे हैं।" यमन में युद्ध के कारण लाखों लोग भूख से मर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का कहना है कि यमन दुनिया की सबसे ख़राब मानवीय संकट के दौर से गुज़र रहा है।

अपने इस पहले संबोधन में जो बाइडन ने और कई अहम मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जर्मनी में मौजूद अमेरिकी सैनिकों की वापसी नहीं होगी। पिछले साल ट्रम्प ने जर्मनी में मौजूद अमेरिकी सैनिकों की संख्या 9,500 कम करने की घोषणा की थी। बाइडन ने अब उस फ़ैसले को पलट दिया है और कहा है कि अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन वैश्विक सैन्य तैनाती की समीक्षा करेंगे और तब तक सैन्य वापसी नहीं होगी। बता दें कि, जर्मनी में क़रीब 34,500 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं और ट्रम्प ने इसे घटाने की घोषणा की थी। ट्रम्प का मानना था कि जर्मनी का रक्षा बजट बहुत कम है। साथ ही बाइडन अमेरिका आने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ाने की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने कहा कि हम आने वाले वर्षों में अमेरिका आने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ाएंगे। ग़ौरतलब है कि, ट्रम्प के दौर में अमेरिका आने वाले शरणार्थियों की संख्या में तेज़ गिरावट दर्ज की गई थी। अब बाइडन इसे बढ़ाकर हर साल 1,25,000 करना चाहते हैं। ट्रम्प ने शरणार्थियों को सुरक्षा के लिए ख़तरा और संसाधनों पर बोझ की तरह बताया था।