18 दिसंबर 2020 - 17:24
दुनिया भर में तेज़ी से पैर पसार रहा "बिटकॉइन" क्या है? क्यों उसकी क़ीमत आसमान छू रही है? इसके इस्तेमाल में कितना है ख़तरा?

क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की क़ीमत बुधवार को पहली बार 20 हज़ार डॉलर के पार चली गई है। आख़िर क्या है यह करेंसी और कैसे काम करती है। दुनिया भर में कभी इसके ख़िलाफ़ ख़ूब हुआ था प्रचार और इसे बताया गया था अर्थव्यवस्था के लिए ख़तरनाक।

तीन साल पहले यही वह समय था जब पहली बार अमेरिकी शेयर बाज़ार वॉल स्ट्रीट में बिटकॉइन के कारोबार को मंज़ूरी मिली और तब इसकी क़ीमत आसमान पर पहुंच गई। बीच में काफ़ी बुरा हाल देखने के बाद इसकी क़ीमत नई ऊंचाइयों को छू रही है। अनिश्चितता के दौर में पैसा सुरक्षित रखने के दूसरे तरीक़ों की तरह ही बिटकॉइन को भी कोरोना महामारी से काफ़ी फ़ायदा हुआ है। सोना, चांदी, प्लैटिनम की क़ीमत इस दौर में कई गुना बढ़ी है और बिटकॉइन भी इसमें शामिल हो गया है। बिटकॉइन की ख़ास संरचना के कारण अब और बिटकॉइन अधिक संख्या में नहीं बन पा रहा है ऐसे में जो बिटकॉइन हैं उनका कारोबार तेज़ हो गया है। बिटकॉइन एक डिजिटल मुद्रा है। यह किसी बैंक या सरकार से नहीं जुड़ी है और इसे बिना पहचान ज़ाहिर किए ख़र्च किया जा सकता है। बिटकॉइन के इन सिक्कों को यूज़र बनाते हैं। इसके लिए उन्हें इनको "माइन" करना पड़ता है। "माइन" के लिए उन्हें गणना करने की क्षमता देनी होती है और इसके बदले में उन्हें बिटकॉइन मिलते हैं। बिटकॉइन के सिक्कों को शेयर बाज़ारों में अमेरिकी डॉलर और दूसरी मुद्राओं के बदले ख़रीदा भी जा सकता है। कुछ कारोबार में बिटकॉइन मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होती है हालांकि बीते कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता ठहरी हुई है।

दिसंबर 2017 में बिटकॉइन फ्यूचर को अमेरिकी शेयर बाज़ार वॉल स्ट्रीट में कारोबार की इजाज़त मिली। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज और शिकागो बोर्ड ऑप ट्रेड ने इनकी ख़रीद बिक्री को मंज़ूरी दी थी। बिटकॉइन को लेकर दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि कारोबार की अनुमति मिलते ही इसकी क़ीमतों में भारी उछाल आया। वर्ष 2017 की शुरुआत में इस मुद्रा की क़ीमत 1000 डॉलर थी जो साल के अंत में बढ़ कर 19,783 तक पहुंच गई। हालांकि कारोबार शुरू होने के बाद बिटकॉइन फ्यूचर अगले कुछ महीनों में तेज़ी से नीचे आया। एक साल बाद ही इसकी क़ीमत घट कर 4000 डॉलर पर चली गई। निवेशकों और बिटकॉइन में दिलचस्पी रखने वालों ने बताया कि वर्ष 2017 में आए उछाल का बड़ा कारण सट्टेबाज़ी और मीडिया का आकर्षण था। कॉइनबेस के मुताबिक़ एक बिटकॉइन की क़ीमत लगभग 20,700 डॉलर है। कॉइनबेस एक प्रमुख डिजिटल करेंसी एक्सचेंज है जो दूसरे टोकन और मुद्राओं का भी कारोबार करती है। हालांकि बिटकॉइन की क़ीमत अस्थिर है और यह एक हफ्ते में ही सैकड़ों या हज़ारों डॉलरों का उतार चढ़ाव देखती है। एक महीने पहले इसकी क़ीमत 17,000 डॉलर थी और एक साल पहले 7000 डॉलर।

वहीं अगर जानकारों की मानें तो बिटकॉइन एक बहुत जोखिम वाला निवेश है और पारंपरिक निवेश के तरीक़ों जैसे कि शेयर या फिर बॉन्ड की तरह व्यवहार नहीं करता, जब तक कि ख़रीदार कई सालों तक इस मुद्रा को अपने पास ना रखे। बिटकॉइन वास्तव में एक कंप्यूटर कोड की श्रृंखला है। यह जब भी एक यूज़र से दूरे के पास जाता है तो इस पर डिजिटल सिग्नेचर किए जाते हैं। लेन देन खुद को गोपनीय रख कर भी किया जा सकता है। इसी वजह से यह आज़ाद ख्याल के लोगों, तकनीकी दुनिया के उत्साही, सटोरियों और अपराधियों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है। बिटकॉइन को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। इस वॉलेट को या तो कॉइनबेस जैसे एक्सचेंज के ज़रिए ऑनलाइन हासिल किया जा सकता है या फिर ऑफलाइन हार्ड ड्राइव में एक ख़ास सॉफ्टवेयर के ज़रिए। बिटकॉइन का समुदाय यह तो जानता है कि कितने बिटकॉइन हैं लेकिन वे कहां हैं इसके बारे में सिर्फ अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है। कुछ कारोबार बिटकॉइन का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे कि ओवरस्टॉक डॉट कॉम बिटकॉइन में भुगतान स्वीकार करता है। इंफो के अनुसार औसतन हर दिन 3,00,000 बिटकॉइन का लेने देन होता है। हालांकि इसकी लोकप्रियता नगद या क्रेडिट कार्ड की तुलना में कम ही है। बहुत सारे कारोबार में इसे भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

बिटकॉइन नेटवर्क सामूहिक अच्छाई के लिए कुछ लोगों की लालसा पर निर्भर करता है। तकनीक के जानकार कुछ लोग जिन्हें माइनर कहा जाता है वो इस तंत्र में गणना की क्षमता ब्लॉकचेन में डाल कर इसे ईमानदार बनाए रखते हैं। ब्लॉक चेन हर बिटकॉइन के लेनदेन का हिसाब रखता है। इस तरह से यह उन्हें दो बार बेचे जाने को रोकता है और माइनरों को उनकी कोशिशों के लिए जब तक तोहफ़ों में बिटकॉइन दिए जाते हैं। जब तक माइनर ब्लॉकचेन को सुरक्षित रखेंगे इसकी नक़ल करके नक़ली मुद्रा बनने का डर नहीं रहेगा। बिटकॉइन को 2009 में एक व्यक्ति या फिर एक समूह ने शुरू किया जो सातोषी नाकामोतो के नाम से काम कर रहे थे। उस समय बिटकॉइन को थोड़े से उत्साही लोग ही इस्तेमाल कर रहे थे। जब ज़्यादा लोगों का ध्यान उस तरफ गया तो नाकामोतो को नक़्शे से बाहर कर दिया गया। हालांकि इससे मुद्रा को बहुत फ़र्क़ नहीं पड़ा यह सिर्फ अपनी आंतरिक दलीलों पर ही चलता रहा। 2016 में एक ऑस्ट्रेलिया उद्यमी ने ख़ुद को बिटकॉइन के संस्थापक के रूप में पेश किया। हालांकि कुछ दिनों बाद ही उसने कहा कि उसके पास सबूतों को ज़ाहिर करने की "हिम्मत नहीं है।" इसके बाद से इस मुद्रा की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं ली है।