22 अक्टूबर 2020 - 13:22
अमरीका अपने ही चुनावों के बारे में ख़तरनाक साज़िश रच रहा है, लेकिन आरोप ईरान पर मढ़ रहा है, तेहरान

संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थायी मिशन ने अमरीकी मतदाताओं को प्रभावित करने वाले अमरीकी अधिकारियों के दावों को घातक और ख़तरनाक क़रार देकर ख़ारिज कर दिया है।

अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों का आरोप है कि ईरान, अमरीकी मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।

ईरानी मिशन के प्रवक्ता अलीरज़ा मीरयूसुफ़ी का कहना है कि तेहरान, वाशिंगटन की तरह दूसरे देशों के चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करता है।

अमरीकी नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक जॉन रैटक्लिफ़ ने दावा किया है कि ईरान और रूस ने 2020 के चुनावों की विश्वसनीयता कम करने के लिए, मतदाता पंजीकरण की जानकारी प्राप्त की थी।

अमरीकी नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक जॉन रैटक्लिफ़ और एफ़बीआई निदेशक क्रिस रे ने अलग से तेहरान पर अमरीका के कई राज्यों के मतदाताओं को धमकी भरे ईमेल भेजने का दावा किया है और कहा है कि यह ईमेल 'प्राउड बॉयज़' समूह द्वारा भेजे गए थे।

रैटक्लिफ़ ने बुधवार की शाम एक विशेष संवाददाता सम्मेलन के दौरान आरोप लगाया कि मतदाताओं को डराने, सामाजिक अशांति को भड़काने और राष्ट्रपति ट्रम्प को नुक़सान पहुंचाने के लिए भेजे गए ईमेल्स के पीछे तेहरान का हाथ है।

अलास्का और फ़्लोरिडा में कुछ पंजीकृत डेमोक्रेट्स मतदाताओं ने धमकी भरे ईमेल प्राप्त करने की बात कही थी, जिसमें उनसे कहा गया था कि प्राउड बॉयज़ के पास आपकी सभी जानकारियां हैं, इसलिए उन्हें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को वोट देने होगा, नहीं तो हम आपको छोड़ेंगे नहीं।

अमरीकी अधिकारियों के आरोपों के जवाब में मीरयूसुफ़ी ने गुरुवार को अपने ट्वीट में कहा कि अमरीकी अधिकारी ख़ुद अपने देश के चुनावों के परिणामों पर अभी से ही सवालिया निशान लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अमरीका की तरह, ईरान दूसरे देशों के चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करता है। दुनिया देख रही है कि अमरीका कितना हताश है कि वह ख़ुद अपने चुनावों के परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों का मक़सद चुनाव की सुरक्षा पर मतदाताओं के भरोसे को कम करने का प्रयास करना है। ईरान को अमरीकी चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही उसके परिणामों से। अमरीका को इस तरह के बेतुके और ख़तरनाक आरोप लगाने से बचना चाहिए।