लंदन का आरोप है कि तेहरान अपनी बक़ाया राशि वसूलने के लिए ज़ग़ारी को बंधक के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
ग़ौरतलब है कि ईरान के पूर्व शासक ने ब्रिटेन से चीफ़टन टैंक ख़रीदने का समझौता किया था और उसके लिए क़ीमत का भुगतान भी कर दिया गया था, लेकिन देश में इस्लामी क्रांति के बाद शासन व्यवस्था बदलने के कारण, ब्रिटेन इस समझौते से पलट गया और उसने तेहरान से ली गई राशि भी वापस नहीं लौटाई थी।
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से एक हालिया इंटरव्यू के दौरान जब ब्रिटेन के इस दावे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार किसी भी बहाने से अगर तेहरान का बक़ाया अदी नहीं करेगी, तो यह खुली चोरी होगी।
नाज़नीन ज़ग़ारी ईरानी मूल की एक ब्रिटिश नागरिक हैं, जो ईरान में ब्रिटेन के लिए जासूसी करने के आरोप में पांच साल जेल की सज़ा काट रही हैं।
39 वर्षीय ज़ग़ारी को 2016 में तेहरान स्थित इमाम ख़ुमैनी एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया था, जब वह ब्रिटेन जाने का प्रयास कर रही थीं।
ज़रीफ़ ने यह भी बताया कि बक़ाया राशि के भुगतान को लेकर ईरान और ब्रिटेन के विदेश मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच क़ैदियों के आदान प्रदान पर भी विचार विमर्श चल रहा है। लेकिन दोनों मामले बिल्कुल अलग-अलग हैं और इनका आपस में कोई लेना-देना नहीं है।
सितम्बर 2020 में ब्रिटेन ने पहली बार स्वीकार किया था कि ईरान का उस पर बक़ाया है, जो हथियारों के समझौते के तहत अदा किया गया था।
लंदन ने यह भी कहा था कि वह ईरान के 40 करोड़ पाउंड अदा करने के मार्गों पर विचार कर रहा है।
ईरान ने इस राशि को लौटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख़ किया था, जिसने 2008 में ईरान के हक़ में फ़ैसला सुनाते हुए ब्रिटेन से कहा था कि वह उसे लौटानी चाहिए, जिसे अभी तक नहीं लौटाया गया है।