तेलअवीव और अबूधाबी के बीच संबंधो को समान्य बनाए जाने की प्रक्रिया का बहैरन द्वारा गर्मजोशी से स्वागत, बहरैन की वायु सीमा से होकर संयुक्त अरब इमारात और इस्राईल के बीच उड़ानों की अनुमति दिया जाना और संयुक्त अरब इमारात के विश्वासघात की समीक्षा के लिए अरब संघ की बैठक की फ़िलिस्तीनियों की मांग को बहरैन द्वारा ठुकराया जाना, यह सब इस बात का चिन्ह है कि बहरैन, इस्राईल से हाथ मिलाने वाला दूसरे देश होगा।
यह सब बातें इस्राईली अधिकारियों की ज़बान पर जारी भी हो चुकी हैं और इसके पक्के सबूत हैं कि बहरैन में भी जल्द ही क़ातिलों के टोले शामिल होगा। इस्राईली अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही वाशिंग्टन में इस्राईल और संयुक्त अरब इमारात के बीच संबंधों के समझौते पर हस्ताक्षर होंगे वैसे ही बहरैन में इस टोले में शामिल हो जाएगा।
संयुक्त अरब इमारात और इस्राईल के बीच शांति समझौते पर वाइट हाऊस में 23 सितम्बर को हस्ताक्षर होंगे। इसी संबंध में इस्राईल से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र टाइम्स आफ़ इस्राईल ने ख़ुफ़िया विभाग के हवाले से रिपोर्ट दी है कि इस्राईल के साथ समझौता, बहरैन, ओमान और सऊदी अरब जैसे फ़ार्स की खाड़ी के अन्य अरब देशों के साथ संबंधों के विस्तार की भूमिका बनेगा।
सऊदी अरब यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह बहरैन और इमारात की तरह, इस्राईल के साथ संबंधो को समान्य बनाने का उत्सुक नहीं है किन्तु टीकाकारों का कहना है कि फ़ार्स की खाड़ी के रजवाड़ों में सऊदी अरब, इस्राईल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के समय के बारे में आले सऊद परिवार में पाए जाने वाले मतभेदों की वजह से इस लाइन में शामिल होने वाला सबसे आख़िरी देश होगा।
लंदन कालेज विश्वविद्यालय में मध्यपूर्व के मामलों के विशेषज्ञ एंड्रस ग्रेक का कहना है कि बहरैन, सऊदी अरब- इस्राईल के बीच संपर्क का केन्द्र होगा।
खेद की बात यह है कि अरबों ने फ़िलिस्तीनी मुद्दे और फ़िलिस्तीन के भविष्य को तेल के रजवाड़ों के हवाले कर दिया है और ख़ुद ही बहाना बनाकर हाथ बांधे बैठे हुए हैं। इनके पास आर्थिक संकट और ट्रम्प के बदले जैसे कई बहाने मौजूद हैं।
जबकि अरबों को यह अच्छी तरह पता है कि तेल के इन रजवाड़ों ने आज तक इस्राईल के साथ एक भी युद्ध नहीं किया बल्कि इस मनहूस शासन के बाक़ी रहने का मुख्य कारण बने हुए हैं। इन रजवाड़ों ने आज तक इस्राईल और अमरीका के हितों की ही सेवा की है और आज भी उनकी सारी क्षमताएं और संभावनाएं अपने स्वामी ट्रम्प और नेतेनयाहू को मुक्ति दिलाने में ख़र्च हो रही हैं जो पूरी तरह आर्थिक, राजनैतिक और शिष्टाचारिक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं।
अरब रजवाड़े इन दोनों को बचाने के लिए हर कोशिश कर रहे हैं चाहे इसके लिए फ़िलिस्तीन की क़ुरबानी ही क्यों न देनी पड़े। यह अरब रजवाड़े यह भूल गये कि इस्राईल ने उनके हित में या उनके लिए एक भी गोली नहीं चलाई और उसको अपने बचाव के लिए समर्थक की आवश्यकता है। इसी तरह यह रजवाड़े यह भूल गये हैं कि उन्होंने अपने शहरों को शीशे का और बहुत ही कमज़ोर बना दिया है जिसका शिकार करना इस्राईल अजगर के लिए बहुत आसान होगा।