उन्होंने ख़ुद को प्रशासनिक मामलों में व्यस्त रखा और व्यापारिक गतिविधियों से दूर रहे। सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने अपने बेटों को विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा दिलाई और उन्हें भी व्यापार से दूर रखा।
उस समय फ़ार्स खाड़ी के एक बड़े अरब अधिकारी ने हमसे संपर्क करके बताया कि जो जानकारियां आपने प्रकाशित की हैं वह दुरुस्त नहीं हैं। सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ की तीसरी पत्नी से उनका एक बेटा है मुहम्मद बिन सलमान जो पूरी तरह व्यापार में ही व्यस्त है, उसके पास कई कंपनियां हैं और देखते ही देखते अरबपति हो गया है।
ब्लड एंड आयल किताब में भी यह बताया गया है कि सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने अपने बेटे मुहम्मद बिन सलमान को व्यापारिक गतिविधियां करने की अनुमति दे दी थी क्योंकि वह हमेशा अपने बाप से बहस करते थे कि जब उनके चचेरे भाई बड़ी बड़ी कंपनियों के मालिक हैं तो वह क्यों न व्यापारिक मैदान में उतरें? मुहम्मद बिन सलमान का कहना था कि शाही परिवार के दूसरे बहुत से लोग हैं जिनके पास देश के भीतर और बाहर बड़े बड़े महल और निजी विमान हैं जबकि सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को कभी कभी क़र्ज़ लेना पड़ जाता है।
किताब ब्लड एंड आयल में बताया गया है कि बिन सलमान को बचपन से ही पैसा कमाने की लालसा थी इसलिए जब वह मात्र 16 साल के थे तो उपहार के तौर पर मिलने वाली महंगी घड़ियां बेचकर उन्होंने 1 लाख डालर की रक़म जमा कर ली थी। मुहम्मद बिन सलमान मैक डोनल्ड्ज़ के खानों के दीवाने हैं और अपने मोटापे से परेशान रहते हैं। मगर वही मुहम्मद बिन सलमान अचानक सत्ता की दौड़ में कूद पड़े और सबको किनारे लगाते हुए क्राउन प्रिंस के पद पर जा बैठे हैं।
दो अमरीकी लेखकों ब्रैडली होप और जस्टिन चेक ने जो वाल स्ट्रीट जरनल के पत्रकार हैं ब्लड एंड आयल के नाम से अपनी किताब में मुहम्मद बिन सलमान के बारे में बहुत से राज़ खोले हैं। उन्होंने लिखा कि यमन युद्ध के बारे में मुहम्मद बिन सलमान से अनुमान की बहुत बड़ी ग़लती हो गई। वह समझ रहे थे कि ज़्यादा से ज़्यादा दो महीने के भीतर यह युद्ध समाप्त हो जाएगा।
दोनों लेखकों ने रिट्ज़ कार्ल्टन होटल में क़ैदी बनाकर रखे जाने वाले राजकुमारों और सऊदी व्यापारियों का मुद्दा भी विशेष रूप से अपनी किताब में उठाया है। किताब में बताया गया है कि बिन सलमान ने 2017 में यह बड़ा क़दम इसलिए उठाया कि उन्हें अपनी ताक़त का नशा था। व्यापार में बार बार नाकाम रहने वाले बिन सलमान ने आरामको जैसी कंपनी पर क़ब्ज़ा करके देश के सारे व्यापारियों और राजकुमारों को यह संदेश दे दिया कि वह सबसे ज़्यादा ताक़तवर हैं। बिन सलमान को सबसे ज़्यादा संतुष्टि उस समय मिली जब उन्होंने मुहम्मद बिन नाएफ़ को क्राउन प्रिंस के ओहदे से नीचे उतार दिया।
देश के भीतर बड़े पैमाने पर उठा पटक करने के साथ ही बिन सलमान ने पश्चिमी देशों में अपनी अच्छी छवि बनाने पर भी बड़ा पैसा उड़ाया। इसके लिए उन्होंने बोस्टन कंसलटैंसी ग्रुप को कई मिलियन डालर अदा किए और सऊदी अरब में विदेशी पूंजीनिवेश लाने के प्रभावी तरीक़ों के बारे में जानकारियां जुटाईं। अपनी इन्हीं कोशिशों के तहत बिन सलमान ने सऊदी अरब में महिलाओं को कार ड्राइव की अनुमति दी।
किताब में यह भी बताया गया है कि सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद ट्रम्प ने अनेक इंटैलीजेन्स रिपोर्टों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया और बिन सलमान के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाया। ट्रम्प ने बस इस बात को ध्यान में रखा कि सऊदी अरब अमरीका का महत्वपूर्ण व्यापारिक पार्टनर है।
दोनों लेखकों का कहना है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि बिन सलमान अगले 50 साल तक सऊदी अरब की बागडोर अपने हाथ में रखें। आने वाले दिनों में बिन सलमान के बारे में और भी किताबें छपेंगी जिनसे यह तसवीर साफ़ होगी कि बिन सलमान किस तरह सऊदी अरब की सत्ता में आगे बढ़ते गए और अब वह सऊदी अरब को कहां ले जाना चाहते हैं।
लंदन से रायुल यौम के लिए महा बरबार की रिपोर्ट