रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तानी सेना की 111वीं ब्रिगेड, जिसे पाकिस्तान की 'तख़्तापलट ब्रिगेड' भी कहा जाता है, एक बार फिर देश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए, सड़कों पर मार्च कर सकती है।
इस बार तख़्तापलट की साज़िश, सऊदी अरब में रची जा रही है।
कश्मीर पर सऊदी अरब के रूख़ से पाकिस्तान आहत है। हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद क़ुरैशी ने पहली बार खुलकर इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी की बैठक के आयोजन में टालमटोल करने को लेकर सऊदी अरब की आलोचना की थी।
इसके अलावा, इमरान ख़ान सरकार ने कुछ अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर सऊदी विरोधी और तुर्की के समर्थन में स्टैंड लिया है, जिससे सऊदी शासक काफ़ी नाराज़ हैं।
क़ुरैशी के बयान के बाद, पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावैद बाजवा ने रियाज़ का दौरा किया था, जिसे दोनों देशों के बीच जारी तनाव कम करने का सेना का प्रयास बताया गया था। लेकिन कुछ मीडिया हल्क़ों का मानना है कि बाजवा के रियाज़ दौरे के दौरान ही पाकिस्तान में एक बिर फिर तख़्तापलट की स्क्रिप्ट तैयार की गई है, क्योंकि सऊदी शासक, इमरान ख़ान सरकार की विदेश नीतियों से ख़ुश नहीं हैं।
इमरान ख़ान सरकार को उखाड़ फेंकने की ज़िम्मेदारी, पूर्व सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ को दी गई है, जो इस समय यमन युद्ध में सऊदी सैन्य गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं।
पाकिस्तान में सऊदी अरब का व्यापक प्रभाव है और सेना समेत कई राजनीतिक पार्टियां तथा धार्मिक संगठनों में उसकी गहरी पैठ है। पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर भी एस तरह की चर्चा है कि जनरल राहील शरीफ़ को इमरान ख़ान के स्थान पर सत्ता सौंपी जा सकती है।
रियाज़ यात्रा के दौरान, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा से मुलाक़ात से इनकार करके इमरान ख़ान सरकार से अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर दी थी। सऊदी अधिकारियों अरब ने पाकिस्तान को तेल की आपूर्ति रोकने तक की धमकी दे डाली थी।
राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि इमरान ख़ान ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की पारम्परिक नीति में बड़ा बदलाव करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही प्रभावशाली रूप से उठाने की योजना बनाई है। 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार द्वारा भारत प्रशासित कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने में इस्लामाबाद काफ़ी हद तक सफल रहा है।
कश्मीर की यथास्थिति बदलने से नाराज़, चीन का भी पाकिस्तान को भरपूर साथ मिल रहा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो की शक्ति हासिल है और वह पिछले एक साल के दौरान, कम से कम दो बार कश्मीर मुद्दे को सुरक्षा परिषद में उठा चुका है।
सूत्रों का कहना है कि इमरान ख़ान सरकार का तख़्तापलट करने की सऊदी योजना पर कब तक अमल होगा, इसके बारे में निश्चित रूप से अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है, लेकिन इस स्क्रिप्ट के तहत पिछले सप्ताह पूर्व जनरल राहील शरीफ़ ने लाहौर में पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में सेना प्रमुख जनरल बावजा से मुलाक़ात की थी। इसलिए ऐसी संभावना है कि अगर सबकुछ योजना के अनुसार रहा तो किसी भी समय सऊदी अरब से इशारा मिलते ही 111वीं ब्रिगेड का इस्लामाबाद की सड़को पर मार्च शुरू हो जाएगा।