23 अगस्त 2020 - 14:49
इराक़ के अहम शहर "बसरा" में अशांति की वजह क्या है? और इसके लक्ष्य क्या हैं?

इराक़ के बसरा नगर में अशांति तेज़ी से बढ़ती जा रही है और प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी अमरीका से वापसी के तुरंत बाद हालात का जायज़ा लेने के लिए बसरा पहुंच गए हैं।

बसरा में पिछले पांच बरस से हर साल गर्मियों में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं और फिर सामाजिक हिंसा का रूप धारण कर लेते हैं। इराक़ को कई बरस से बेरोज़गारी व सरकारी सेवाओं में कमज़ोरी विशेष रूप से बिजली व पानी की आपूर्ति में कमी जैसी समस्याओं का सामना है। अलबत्ता इसे आदिल अब्दुल महदी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार से नहीं जोड़ा जा सकता जिसके पास एक साल सत्ता रही थी। इसी तरह इन समस्याओं को मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी की सरकार से नहीं जोड़ा जा सकता। इस तरह की समस्याएं सद्दाम की सरकार और इसी तरह अमरीका द्वारा इराक़ पर अवैध क़ब्ज़े की विरासत हैं।

 

इराक़ में इसी के साथ जो नई चुनौतियां व समस्याएं सामने आई हैं वह भी इस देश की जनता को बहुत ज़्यादा तकलीफ़ पहुंचा रही हैं। इनमें से एक भ्रष्टाचार है और दूसरा नागरिक कार्यकर्ताओं की हत्या है। इराक़ में भ्रष्टाचार सात सिरों वाले ड्रेगन में बदल चुका है जिसे समाप्त या कम करने का कोई रास्ता सुझाई नहीं देता। सन 2003 से लेकर जब सद्दाम सरकार का पतन हुआ, अब तक यानी पिछले सत्रह साल में इराक़ में आर्थिक भ्रष्टाचार का आंकड़ा अविश्वसनीय है। इस दौरान लगभग 400 अरब डाॅलर का भ्रष्टाचार हुआ है जो आम लोगों के लिए स्वीकार्य नहीं है क्योंकि लोगों का मानना है कि इतने पैसों से बेरोज़गारी, पीने के पानी व बिजली के संकट और बुनिायदी ढांचे की कमियों को दूर किया जा सकता था। बसरा के लोगों की एक आपत्ति यह है कि इराक़ और विशेष कर बसरा के धनवान होने के बावजूद इस प्रांत में बेरोज़गारी और पानी व बिजली का संकट क्यों है? इराक़ के तेल स्रोतों में से 65 अरब बैरल बसरा में हैं और हर दिन बसरा का 35 लाख बैरल तेल निर्यात होता है लेकिन इस शिया बाहुल्य प्रांत को तेल की आय से कुछ भी हासिल नहीं होता।

 

बसरा की जनता की इस आपत्ति के साथ ही नागरिक कार्यकर्ताओं की हत्या ने भी जिसे इराक़ में हिंसा फैलाने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया है, जनता के आक्रोश में विस्फोट का काम किया है। अलकाज़ेमी की सरकार ने कुछ समय पहले बसरा के पुलिस प्रमुख और कई सुरक्षा अधिकारियों को उनके पद से हटा कर प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की थी लेकिन वह सफल नहीं रही। पिछले एक महीने में आठ लोगों की ओर पिछले एक हफ़्ते में तीन लोगों की अज्ञात बंदूक़धारियों ने हत्या की है जिनमें डाइटीशियन श्रीमति डाॅक्टर रहाम याक़ूब की हत्या ने हिंसा भड़का दी।

 

इराक़ के टीकाकारों व अहम हस्तियों का कहना है कि बसरा में जो कुछ हो रहा है वह दुश्मनों व आंतरिक विरोधियों की तरफ़ से किया जा रहा है। असाएबे अहलुल हक़ के महासचिव क़ैस ख़ज़अली का कहना है कि बसरा के हालात के राजनैतिक लक्ष्य हैं और कुछ प्रभावी पक्ष इन परिस्थितियों को रेखांकित कर रहे हैं। इराक़ के पूर्व प्रधानमंत्री और क़ानून की सरकार नामक गठजोड़ के प्रमुख नूरी अलमालेकी का भी कहना है कि बसरा के हालात, राजनैतिक लक्ष्यों के तहत ख़राब किए गए हैं। उनका कहना है कि बसरा के हालात के पीछे दो अहम राजनैतिक लक्ष्य हैंः

पहला लक्ष्य बसरा प्रांत के गवर्नर असअद अलईदानी को उनके पद से हटाना है। अलईदानी इससे पहले इराक़ की संसद में अलबेना गठजोड़ की ओर से प्रमानमंत्री पद के उम्मीदवार थे लेकिन मुक़तदा सद्र के नेतृत्व वाले साएरून गठजोड़ ने उनका विरोध किया था। इसी तरह सऊदी अरब के अलहदस व अलअरबिया टीवी चैनलों ने भी उन पर कड़े हमले किए थे। अलईदानी ने फ़रवरी 2019 में ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका के प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा था कि बसरा एक दिन भी इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका के प्रतिबंधों का भाग नहीं बनेगा। हम कभी यह बात स्वीकार नहीं करेंगे कि हमारे पड़ोसी देश को इराक़ के माध्यम से यातना दी जाए।

नूरी मालेकी के अनुसार बसरा में हंगामों के पीछे दूसरा राजनैतिक लक्ष्य हूत नामक बड़ी जेल के दरवाज़ों को तोड़ना और इसमें बंद अहम क़ैदियों को छुड़ाना है। प्रतिबंधित बास पार्टी के अनेक सरग़ना और सऊदी समर्थित अनेक आतंकी इसी जेल में क़ैद हैं।