22 अगस्त 2020 - 15:29
इस्राईल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के मार्ग में क्या ईरान रुकावट बन गया?

इस्राईल और यूएई के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के समझौते की घोषणा के बाद, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने फ़ार्स खाड़ी के अन्य अरब देशों, ख़ास तौर पर सऊद अरब से कहा था कि वह भी अबू-धाबी के नक़्शे क़दम पर चलते हुए इस्राईल के साथ ऐसा ही समझौता करें।

पिछले कई वर्षों से इस्राईल और अरब देशों के बीच बढ़ते सहयोग को देखते हुए ऐसी प्रबल संभावना है कि सऊदी अरब और फ़ार्स खाड़ी के अन्य अरब देश, इस्राईल के साथ समझौता करके अपने रिश्तों से पर्दा उठा देंगे।

इस्लामी जगत में व्यापक पैमाने पर जहां इस्राईल-यूएई समझौते की आलोचना की गई, वहीं बहरैन और ओमान जैसे फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों ने उसका स्वागत करके अपनी नीयत ज़ाहिर कर दी। जबकि क़तर और सऊदी अरब ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी।

हालांकि इस्लामी जगत का मूड देखकर अब सऊदी अधिकारियों ने कहना शुरू कर दिया है कि जब तक इस्राईल और फ़िलिस्तीनियों के बीच शांति समझौता नहीं हो जाता, रियाज़, तेल-अवीव के साथ समझौता नहीं करेगा।

जबकि सच्चाई यह है कि अरब देशों के अंहकारी शासकों को अब फ़िलिस्तीनियों और मुसलमानों के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि अगर ऐसा होता तो वे फ़िलिस्तीन और कश्मीर जैसे मुद्दों को कभी भी हाशिए पर नहीं धकेलते।

दर असल, दशकों से इस्राईली और अमरीकी अरब शासकों का ब्रेन वाश कर रहे हैं और उनके दिमाग़ में यह बात फ़िट कर रहे हैं कि उनके लिए क्षेत्र में असली ख़तरा इस्राईल नहीं, बल्कि ईरान है।

एक दूसरी बात जो अरब शासकों के दिमाग़ में बैठ गई है, वह यह है कि इस्राईल के सहयोग के बिना, उनके आर्थिक व सामरिक हित सुरक्षित नहीं रह सकते।

दूसरी ओर, इस्राईल के साथ सऊदी अरब के समझौते में देरी का कारण भी किसी न किसी तरह ईरान ही है।

13 अगस्त को यूएई ने जब इस्राईल के साथ समझौते का एलान किया तो फ़िलिस्तीनियों के बाद, ईरान और तुर्की, केवल दो ऐसे मुस्लिम देश थे, जिन्होंने बहुत ही मुखर होकर और कड़े शब्दों में यूएई के इस क़दम की निंदा की।

मुस्लिम देशों की सरकारों ने यूएई के इस क़दम पर जो भी स्टैंड लिया हो, लेकिन दुनिया भर के मुसलमान उसकी आलोचना में ईरान और तुर्की के साथ खड़े नज़र आए। सऊदी अरब को भी यह डर सता रहा है कि अगर उसने यूएई का अनुसारण किया, तो इस्लामी जगत में उसे हाशिए पर धकेल दिया जाएगा और मुसलमान व इस्लामी देश ईरान और तुर्की के नेतृत्व पर एकजुट हो जायेंगे।