ऐसा लगता है कि इस्राईल से संबंध स्थापित करने की ट्रेन को सन 1978 में मिस्र से चलने के बाद फार्स की खाड़ी तक पहुंचने में तो 40 साल लग गये लेकिन अब वहां से उसे सऊदी अरब पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा।
यूएई और इस्राईल के बीच संबंध स्थापना का जो एलान हुआ वह दर अस्ल दोनों सरकारों के बीच दशको से जारी गुप्त सहयोग का ही परिणाम था जैसा कि यही हाल रियाज़ और तेलअबीब के बीच संबंधों का है जिनका बहुत जल्द औपचारिक रूप से एलान किया जा सकता है।
यूएई और इस्राईल के बीच संबंध स्थापना की डील सऊदी अरब और वहां के क्राउन प्रिंस बिन सलमान की पूरी देख रेख में हुई जैसा कि इस्राईली समाचार पत्र यदीऊत अहरोनूत ने जानकारी दी है और यह भी बताया है कि वैसे ही संबंध जल्द ही सऊदी अरब और इस्राईल के बीच स्थापित होने वाले हैं। बल्कि यह भी कहा जा रहा है कि युएई और इस्राईल के बीच संबंध का अस्ल मक़सद ही सऊदी अरब और इस्राईल के बीच संबंध स्थापित करना है और ट्रम्प के सलाहकार और उनके दामाद जेयर्ड कुशनर कह चुके हैं कि सऊदी अरब निश्चित रूप से इस्राईल से संबंध बनाएगा।
डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलिस्तीन के लिए जिस सेंचुरी डील का एलान किया है उसके बारे में सब से अधिक सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान को ही मालूम था और उनके साथ ही अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ायद भी थे।
यही वजह है कि लेबनान के अलअलखबार समाचार पत्र ने बताया था कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने सेंचूरी डील स्वीकार करने के बदले फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास को 10 अरब डालर देने का प्रस्ताव दिया था हालांकि महमूद अब्बास ने बिन सलमान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया क्योंकि इस तरह से उनके राजनीतिक भविष्य का अंत हो जाता।
फरवरी में यहूदियों का एक प्रतिनिधिमंडल रियाज़ गया था जो सन 1993 से अब तक की इस प्रकार की पहली यात्रा थी।। इस यात्रा में यह यहूदी प्रतिनिधमंडल 5 दिनों तक सऊदी अरब में रहा। इस प्रतिनिधि मंडल से बिन सलमान ने भी भेंट की।
यहूदी प्रतिनिधिमंडल ने जिन लोगों से भेंट की उनमें इस्लामी संपर्क संगठन के जनरल सेक्रेटरी मुहम्मद ईसा भी थे जिन्होंने कुछ दिनों पहले होलोकास्ट मे मारे जाने वालों को कैंप का दौरा किया था और नाज़ियों के हाथों मारे जाने वाले यहूदियों के लिए दुआ की थी।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने अपने देश में बड़े बड़े और बुनियादी परिवर्तन किये हैं और अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को भी दबा दिया है। अब सऊदी अरब में बहुत कुछ बदल चुका है। सन 1978 में जब मिस्र ने कैंप डेविड समझौते पर हस्ताक्षर किये थे तो सऊदी अरब ने बहुत कड़ी आपत्ति की थी और खुल कर विरोध किया था लेकिन आज वह यूईए की डील पर चुप है बल्कि इस डील के खिलाफ बोलने वाले अपने देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं की गर्दन भी पकड़ी जा रही है।
इस तरह से हम देख रहे हैं कि सऊदी अरब बहुत तेज़ी के साथ इस्राईल के साथ संबंध स्थापना की घोषणा की तरफ बढ़ रहा है बस समस्या वही है जिसका उल्लेख इस्राईली समाचार पत्र ने लिया है।
इस्राईली समाचार पत्र यदीऊत अहारोनूत ने अमरीका के अरबपति यहूदी " हाईम साबान" के हवाले से लिखा है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस इस्राईल के साथ खुल कर संबंध स्थापित करने के बाद ईरानियो और क़तरियों के हमलों से डरते हैं।
यूएई और इस्राईल में समझौता कराने में बेहद सक्रिय रहे साबान बताते हैं कि उन्होंने बिन सलमान से भेंट की और उनसे पूछाः इस्राईल के साथ सऊदी अरब के संबंध अभी तक क्यों खटाई में पड़े हैं? तो बिन सलमान ने कहा कि वह एक मिनट में सऊदी अरब और इस्राईल के बीच संबंध स्थापित कर सकते हैं लेकिन उन्हें क़तरियों और ईरानियों की ओर से हमले का डर है इसी तरह उन्हें अपने देश के भीतर भी संकट पैदा होने का खतरा महसूस हो रहा है।Q.A. साभार, अलखलीज ऑनलाइन।