सोमवार को रोजेन ने कहाः अगर यह वास्तव में यहूदियों के संरक्षण के लिए है, तो इसका कोई मतलब ही नहीं है, क्योंकि आप सभी को एक ऐसे स्थान पर संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो हमेशा अस्थिर रहा है।
यहूदी अभिनेता अपनी आने वाली फ़िल्म एन अमेरिकन पिकल के लिए प्रचार कर रहे हैं। इसमें 1920 में अमरीका पहुंचने वाले एक यहूदी आप्रवासी की कहानी है, जो कहता है कि इस्राईली राज्य का विचार बचपन से ही अन्य यहूदियों के साथ उसे घुट्टी में पिलाया गया था।
रोजेन का कहना था कि एक यहूदी होने के रूप में मेरा भी यही मानना है कि मेरे पूरे जीवन में इस्राईल के बारे में मुझे जमकर झूठ परोसा गया। उन्होंने आगे कहाः आपको पता होना चाहिए कि वे आपको कभी नहीं बताते हैं कि वहां पहले से ही लोग (फ़िलिस्तीनी) रहते आए हैं। वे ऐसा ज़ाहिर करते हैं कि वहां आपका हमेशा से इंतज़ार किया जाता रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने इस बयान के बाद, ज़ायोनियों द्वारा निशाना बनाए जाने और यातनाएं दिए जाने के लिए तैयार हैं।
14 मई 1948 को अवैध रूप से वजूद में आने वाले इस्राईल के बारे में ज़ायोनी शासन के प्रोपैगंडे को उन्होंने सरासर झूठ क़रार दिया।
रोजेन का कहना था कि यह डरावना हो सकता है, लेकिन हम भी यहूदी हैं, अगर कोई झूठ फैला सकता है तो हम भी जो चाहते हैं वह कह सकते हैं।
जहां ज़ायोनी उनके इस खुले विचार की निंदा कर रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर लोग उनकी जमकर तारीफ़ भी कर रहे हैं।
लेखक और पॉडकास्टर एलिसा क्लेन ने भी यह कहते हुए रोजेन के बयान का समर्थन किया है कि उन्हें भी स्कूल में "इस्राईल के बारे में बहुत सारा झूठ भराया गया है" और इस झूठ पर विश्वास करने के लिए प्रेरित भी किया जाता था।
उनका कहना था कि जब तक वह विश्वविद्यालय नहीं पहुंची थीं, तब तक उनके सामने सच्चाई नहीं आई थी।
क्लेन का कहना था कि जब मैं छोटी थी तो उन्होंने (ज़ायोनियों) हमें फ़िलिस्तीनियों के बारे में कुछ नहीं बताया था।