इस्राईल का दावा है कि वह सीरिया में ईरान और उसके समर्थक स्वयं सेवी बलों के ठिकानों को निशाना बनाता है और वह सीरिया में ईरान को पैर जमाने की अनुमति नहीं देगा।
हाल ही में सीरियाई सैन्य सूत्रों ने गोलान हाइट्स को इस्राईल के क़ब्ज़े से आज़ाद कराने के लिए अभियान शुरू करने का संकेत दिया था, जिसकी इस्राईल पिछले काफ़ी समय से आशा कर रहा था।
दर असल, 1973 से इस्राईल और सीरिया के बीच एक प्रकार का युद्ध विराम लागू था, हालांकि इसे किसी भी तरह से शांति का नाम नहीं दिया जा सकता था। इसलिए कि तेल-अवीव के साथ शांति के लिए दमिश्क़ की पहली शर्त गोलान हाइट्स और 1967 के बाद क़ब्ज़ा किए गए इलाक़ों की आज़ादी रही है।
दूसरी ओर इस्राईल किसी भी क़ीमत पर भू-राजनीतिक और भू-रणनीतिक महत्व वाले गोलान हाइट्स को आज़ाद करने के लिए तैयार नहीं है, इसलिए उसने सीरिया की इस शर्त को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
1973 के बाद से दोनों सीधे टकराव से बचते रहे, यहां तक कि 2011 में सीरिया में राजनीतिक संकट शुरू हो गया।
जैसे ही सीरियाई सरकार और सेना ने विदेश समर्थित आतंकवादी गुटों के ख़िलाफ़ मोर्चा संभाला, इस्राईल को सीरिया के रक्षात्मक आधारभूत ढांचे को नष्ट करने का मौक़ा मिल गया और उसने सीरियाई सेना और स्वयं सेवी बलों को कमज़ोर करने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक दी।
दूसरी ओर, इस्राईल को इस बात का विश्वास था कि जब तक सीरियाई सेना आतकंवादी गुटों के साथ लड़ाई में व्यस्त है और आतकंवादियों के क़ब्ज़े से देश के एक-एक इंच इलाक़े को आज़ाद नहीं करा लेगी, उसके हमलों का जवाब नहीं देगी।
सीरियाई संकट का एक दूसरा रुख़ यह है कि इसने ईरान और उसका समर्थन प्राप्त प्रतिरोधी गुटों को सीरिया में पैर जमाने का अवसर प्रदान किया, जिसके नतीजे में उन्होंने असद सरकार के समर्थन के साथ-साथ अपनी रक्षात्मक रणनीतिक का विस्तार शुरू कर दिया।
ईरान ने हालिया वर्षों के दौरान, सीरियाई सेना और प्रतिरोधी गुटों को प्रशिक्षण के साथ ही आधुनिक हथियारों से लैस किया है, ताकि भविष्य में इस्राईल की उत्तरी सीमा पर किसी भी संभावित लड़ाई के लिए उन्हें तैयार कर सके।
इस्राईल अपनी आंखों के सामने इतना बड़ा ख़तरा देखकर, घबराया हुआ है और वह पूरी ताक़त से इन हथियारों और आधारभूत ढांचे को नष्ट करने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि इस्राईली हमले सीरिया में ईरान और प्रतिरोधी गुटों के सैन्य उपकरणों और रक्षात्मक ढांचे को नष्ट करने में नाकाम रहे हैं। इसके बावजूद, हालिया दिनों में देखने में आया है कि सीरियाई सेना और स्यवं सेवी बलों ने सीरियाई हमलों का जवाब देना शुरू कर दिया है।
इसका मतलब यह है कि अब वह दिन दूर नहीं, जिसका इंतज़ार इस्राईल को भी था, अर्थात इस्राईल की उत्तरी सीमा पर एक बड़ी लड़ाई की शुरूआत। अब वक़्त है कि सीरियाई सेना और प्रतिरोधी मोर्चा इस्राईल से उन सब हमलों का जवाब तलब करे, जो उसने हालिया वर्षों के दौरान अजांम दिए हैं।