16 जुलाई 2020 - 12:30
फिर सरपट दौड़ने लगी चीनी इकानोमी, कोरोना वायरस के बाद के माहौल में क्या रेस का अकेला धावक  बनेगा चीन?

कोरोना वायरस की महामारी ने सारी दुनिया में हाहाकर मचा दिया है और बहुत से देशों की इकानोमी गंभीर संकट में पड़ गई है या पड़ने वाली है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकारों ने गंभीर जोखिम होने के बावजूद लाक डाउन खोल दिया है।

इस बीच चीन बिल्कुल अलग उदाहरण स्थापित करता नज़र आ रहा है। चीन जहां इस वायरस के संक्रमण की शुरुआत हुई अब महामारी पर पूरी तरह क़ाबू पा चुका है और चौंकाने वाली ख़बर आ रही है कि चीन की इकानोमी सरपट दौड़ने लगी है।

कोरोना वायरस की महामारी से पहले भी यह अनुमान लगाया जा रहा था कि चीन की विकास दर में गिरावट आएगी और इस वजह से दुनिया की बहुत सी अर्थ व्यवस्थाओं पर असर पड़ेगा क्योंकि चीन की अर्थ व्यवस्था से अब विश्व अर्थ व्यवस्था जुड़ी हुई है। कोरोना वायरस का संकट पैदा हो जाने के बाद चीन के लिए यह चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं कि इससे इस बड़ी अर्थ व्यवस्था को भारी नुक़सान पहुंच जाएगा। मगर रिपोर्ट के अनुसार साल की दूसरी तिमाही में जीड़ीपी में 3.2 प्रतिशत की विकास दर नोट की गई है।

चीन के नेशनल ब्योरो आफ़ स्टैटिसटिक्स एनबीसी ने गुरुवार को रिपोर्ट जारी की जिसके अनुसार साल के पहले क्वार्टर में तो चीन की इकानोमी में 6.8 प्रतिशत की रिकार्ड गिरावट आई। यह 1992 में तिमाही विकास रिकार्ड तैयार किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी गिरावट थी।

रोयटर्ज़ और ब्लूमबर्ग ने दूसरी तिमाही में चीन की अर्थ व्यवस्था में क्रमशः 2.5 प्रतिशत और 2.4 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया था मगर इन सारे अनुमानों को ग़लत साबित करते हुए चीन ने 3.2 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है।

चीन जैसी बड़ी इकानोमी के लिए यह विकास दर बहुत बड़ी सफलता है क्योंकि महामारी के कारण बहुत से देशों की विकास दर शून्य या उससे भी नीचे पहुंच जाने की आशंका है।

इस स्थिति का नतीजा यह होगा कि अमरीका जो चीन से आर्थिक युद्ध में व्यस्त है वर्तमान हालात में और भी कमज़ोर पड़ जाएगा क्योंकि वह चीन के मुक़ाबले में पहले ही अपनी कमज़ोर स्थिति के कारण गहरी चिंता में है।

अमरीकी सरकार को भलीभांति इस स्थिति का अंदाज़ा है जिसके कारण ट्रम्प सरकार का ध्यान महामारी से फैले संकट पर कम और तालाबंदी के कारण हो रहे आर्थिक नुक़सान पर ज़्यादा है क्योंकि उसे डर है कि कहीं चीन रेस के मैदान का अकेला धावक न बन जाए।