15 जुलाई 2020 - 19:14
पहली जुलाई को वेस्ट बैंक का इस्राईल में विलय करने वाले नेतनयाहू किस बात से डर गए?

ज़ायोनी शासन ने जब वेस्ट बैंक के 30 फ़ीसद भाग का इस्राईल में विलय करने के लिए पहली जुलाई की तारीख़ निर्धारित की तो उसके पश्चिमी समर्थकों, ज़ायोनी संगठनों और विशेषज्ञों के बीच खलबली मच गई, लेकिन यह बैचेनी फ़िलिस्तीनियों पर आने वाली आफ़त को लेकर नहीं, बल्कि इस क़दम के इस्राईल पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को लेकर थी।

इस्राईल के समर्थकों को फ़िलिस्तीनियों के कड़े प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली कड़ी प्रतिक्रियाओं के परिणाम स्वरूप, ज़ायोनी शासन के पतन की चिंता सताने लगी।

दूसरी ओर इस्राईल के दोस्त अरब शासकों को अपने देशों की जनता के रोष के कारण, ज़ायोनी शासन के साथ दोस्ती के प्रयास खटाई में पड़ते नज़र आने लगे।

मई 1948 में जब इस्राईल की अवैध स्थापना का एलान किया गया तो ज़ायोनी शासन स्तीन के इस्राईल में विलय की घोषणााष्ट्र संघ द्वारा 1947 में फ़िलिस्तीनियों को दीणों को सार्वजनिक किया जाएगा। अगर ने 50 फ़ीसद फ़िलिस्तीनी इलाक़ों का अवैध इस्राईल में विलय कर दिया।

1967 में ज़ायोनी शासन ने बैतुल मुक़द्दस का विलय कर लिया और उसके बाद 1981 में सीरिया के गोलान हाइट्स का। यह सच है कि राष्ट्र संघ और दुनिया के अधिकांश देशों ने इस विलय को कभी मान्यता नहीं दी और इसकी निंदा की, लेकिन जिस पैमाने पर वेस्ट बैंक के विलय पर चेतावनी जताई गई, वह अभूतपूर्व है।

यहां सवाल यह है कि इस्राईल के ग़ैर क़ानूनी कार्यों पर हमेशा ख़ामोश रहने वाले या उसका समर्थन करने वाले पश्चिमी और अरब देश और संगठन, अचानक 30 फ़ीसद वेस्ट बैंक के विलय पर परेशान हो उठे, जबकि इस्राईल ने पिछले 50 वर्षों से वेस्ट बैंक पर क़ब्ज़ा कर रखा है। हालांकि ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने यह क़दम, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की तथाकथित डील ऑफ़ द सेंचरी के तहत उठाया था।

दर असल, इस्राईल का अवैध वजूद फ़िलिस्तीनी इलाक़ों पर अवैध क़ब्ज़ा, फ़िलिस्तीनियों की भूमि की चोरी और उनकी आबादी के निष्कासन पर आधारित है। लेकिन इसके बावजूद, इनमें से किसी भी क़दम ने इस्राईल के स्थायित्व को सुनिश्चित नहीं किया है।

नेतनयाहू के इस क़दम का विरोध करने वाले पश्चिमी और अरब देशों को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर ज़ायोनी शासन ने यह क़दम उठाया तो यह किसी फ़िलिस्तीनी इलाक़े का अंतिम विलय होगा और इस्राईल अपना 100वां जन्मदिन नहीं मना पाएगा। हालांकि 1948 में चोरी की गई ज़मीन पर इस्राईल के अवैध वजूद की स्थापना करने वालों ने यह कभी सोचा भी नहीं होगा।