सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 36 का अनुवादः
और उनमें से अधिकांश लोग केवल विचारों (और कल्पनाओं) का अनुसरण करते हैं। निश्चित रूप से विचार और कल्पनाएं मनुष्य को सत्य से आवश्यकता मुक्त नहीं करतीं। निसंदेह ईश्वर उनके कर्मों से भलि भांति अवगत है।
संक्षिप्त टिप्पणी:
निराधार एवं तर्कहीन विचार और कल्पनाएं इस बात का कारण बनी हैं कि वे सत्य को छोड़कर इस प्रकार की ग़लत व अनुचित अवधारणाओं की ओर उन्मुख हों जबकि वैचारिक और आस्था संबंधी समस्याओं में कल्पनाओं का कोई स्थान नहीं होता बल्कि जिस बात का महत्त्व होता है वह विश्वास है कि जो मनुष्य को सत्य तक पहुंचाता है।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
- नैतिक व आस्था संबंधी मामलों में बहुसंख्या सत्यता का प्रमाण नहीं है।
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हो सकता है कि अधिकांश लोग कर्म या विचार में पथभ्रष्टता का शिकार हों अतः यह उनके कर्म या विचार के सही होने का प्रमाण नहीं हो सकता।
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कुफ़्र व अनेकेश्वरवाद का कोई वैज्ञानिक व तर्कसंगत आधार नही है तथा कल्पनाएं भी निराधार होती हैं।