25 जून 2020 - 15:25
सऊदी अरब की राजधानी सहित कई ठिकानों पर इस बार होने वाला मिसाइल और ड्रोन हमला पिछले हमलों से कैसे अलग है? क्या रक्षा मंत्रालय और इंटेलीजेन्स मुख्यालय भी निशाना बने? क्या है संदेश?

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ और अन्य स्थानों पर मौजूद ठिकानों पर जो मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं उनसे सबसे स्पष्ट संदेश यह सामने आया है कि यह आंदोलन अब क्षेत्रीय ताक़त बन चुका है जिसे नज़रअंदाज़ कर पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है।

इसलिए नहीं कि उसकी हमले की ताक़त लगातार बढ़ रही है बल्कि इसलिए भी कि उसके मिसाइलों के निशाने बड़े सटीक हैं और उससे ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यमन पर सऊदी एलायंस के हर हमले के जवाब में इंतेक़ामी हमला करने की राजनैतिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति है।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के हमले से सऊदी अरब को कितना नुक़सान हुआ इस बारे में अलग अलग विचार सामने आ रहे हैं। सऊदी एलायंस के प्रवक्ता जनरल तुर्की अलमालेकी ने तो दावा किया कि सारे मिसाइलों और आठ ड्रोन विमानों को मार गिराया गया मगर अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता मुहम्मद अलबुख़ैती ने कहा कि मिसाइलों और ड्रोन विमानों ने रक्षा मंत्रालय, इंटेलीजेन्स के मुख्यालय और किंग सलमान एयरबेस को राजधानी रियाज़ में निशाना बनाया जबकि सीमावर्ती प्रांतों जीज़ान और नजरान में भी कई ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

मिस्र, अलजीरिया और दूसरे कई अरब देशों ने सऊदी अरब पर होने वाले हमलों की जिस तरह निंदा की और जिस तरह सऊदी अरब से हमदर्दी जताई उससे साफ़ ज़ाहिर है कि अंसारुल्लाह आंदोलन हमलों के बारे में जो कह रहा है वही बात सही है। यानी मिसाइलों और ड्रोन विमानों ने सऊदी अरब के भीतर और ख़ास तौर पर राजधानी रियाज़ में अपने निशानों को पूरी सफलता से ध्वस्त किया है।

अंसारुल्लाह आंदोलन को अरब देशों से शिकायत है कि जब सऊदी एलायंस यमन के ग़रीब लोगों पर बेरहमी से बमबारी करता है तो यह अरब देश रेत में सिर डाल के सो जाते हैं और उनके मुंह से आलोचना का एक शब्द भी नहीं निकलता मगर जब अंसारुल्लाह की ओर से जवाबी हमला होता है तो इन देशों के नेताओं की ज़बान अंकुरित हो जाती है।

यमन युद्ध पांच साल पूरा करके छठें साल में प्रवेश कर चुका है मगर इस युद्ध में सऊदी एलायंस अपना एक भी लक्ष्य पूरा नहीं कर सका बल्कि अब तो यह हालत है कि यमन की धरती पर सऊदी अरब का सबसे बड़ा दुशमन अंसारुल्लाह आंदोलन नहीं वह संगठन है जिसका इमारात समर्थन कर रहा है। इस संगठन ने अदन से सऊदी अरब के एजेंटों को पूरी तरह बेदख़ल कर दिया है।

राजधानी रियाज़ को निशाना बनाने वाले मिसाइल हमलों के बाद अब सऊदी अरब और अंसारुल्लाह की वार्ता होनी चाहिए ताकि जंग समाप्त करने के बारे में कोई समझौता हो सके। इसके  लिए ज़रूरी है कि सऊदी अरब अंसारुल्लाह की ताक़त को स्वीकार करे और यह भी माने कि इस्लामी जगत के नेतृत्व का दावा करने वाली सऊदी सरकार की साख अब बहुत कमज़ोर हो गई है।