5 जून 2020 - 17:13
कैसे जानें कि आपको नज़ला है, एनफ़्लुएंज़ा है या कोरोना? फेफड़ों में कैसे उतर जाता है वायरस?

क्या नाक से पानी आ रहा है? क्या आपको बुख़ार है? कैसे पता चल सकता है कि आपको सर्दी हुई है या आप कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी कोविड-19 का शिकार हो गए हैं? जवाब के लिए यह लेख पढ़िए!

सबसे पहले हम नज़ला और ज़ुकाम की बात करते हैं। 200 से अधिक क़िस्म के वायरस हैं जिनकी वजह से नज़ला ज़ुकाम हो जाता है इनमें एक वायरस का नाम रीनो वायरस है जबकि कोरोना वायरस के परिवार के भी कुछ वायरस हैं जिनसे इंसान को ज़ुकाम हो जाता है और निम्नलिखित समस्याएं होती हैं,

  1. सांस के सिस्टम के ऊपरी भाग में तकलीफ़
  2. नाक बंद हो जाना
  3. गले में इन्फ़ेक्शन
  4. नाक से पानी बहना
  5. छींकें आना
  6. यह लक्षण काफ़ी हल्के होते हैं।

एनफ़्लुएंज़ा

यह हवा में फैले विभिन्न प्रकार के एनफ़्लुएंज़ा वायरसों से हो जाता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेज़ी से फैलता है। संक्रमण के शुरआती पांच दिनों के भीतर वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेज़ी से स्थानान्तरित होता है।

इसके लक्षणः

  1. बुख़ार
  2. सिरदर्द
  3. थकन बदन में दर्द
  4. कभी कभी नाक से पानी बहना, छींकें आना और गले में दर्द
  5. एनफ़्लुएंज़ा के लक्षण ज़ुकाम से ज़्यादा तकलीफदेह होते हैं।
  6. कुछ लोगों की भूख मर जाती है, कुछ को दस्त आने लगता है या पेट में दर्द होता है।
  7. अधिक केस बिगड़ जाए तो एनफ़्लुएंज़ा से भी फेफड़ों में इनफ़ेक्शन हो जाता है।

कोविड-19

कोविड-19 बीमारी कोरोना वायरस से होती है इसमें जो लक्षण सामने आते हैं वह निम्नलिखित हैं,

  1. खांसी
  2. सांस लेने में तकलीफ़
  3. बुख़ार
  4. सूंघने की शक्ति कम या ख़त्म हो जाना
  5. स्वाद चखने की क्षमता कम या ख़त्म हो जाना
  6. कभी कभी फेफड़ों में इन्फ़ेक्शन हो जाता है
  7. कभी बीमार की किडनी फ़ेल हो जाती है और ज़्यादा गंभीर स्थिति हो तो बीमार की मौत हो जाती है।
  8. अगर सर्दी लगी है तो शुरू के दो दिनों में लक्षण ज़्यादा बढ़ जाते हैं जबकि कोरोना वायरस के लक्षण संक्रमित होने के दो दिन बाद से लेकर 14 दिन तक ज़ाहिर हो सकते हैं।

कभी कभी सूंघने और चखने की क्षमता का ख़त्म हो जाना महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है। दक्षिणी कोरिया, चीन और इटली में अधिकतर कोरोना मरीज़ों का कहना था कि उनकी सूंघने और स्वाद चखने की क्षमता बहुत कम हो गई।

वैसे जुकाम और एनफ़्लुएंज़ा में भी नाक बंद हो जाती है जिससे सूंघने की क्षमता कम हो जाती है मगर कोरोना वायरस के बीमारों में यह लक्षण ज़्यादा गंभीर होता है।

अधिकतर कोरोना संक्रमित लोगों में लक्षण नज़र नहीं आते या बहुत हल्के होते हैं इसलिए अगर हल्के लक्षण दिखाई दें तब भी तत्काल डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 

कोरोना वायरस फेफड़ों में नाक के रास्ते जाता है या मुंह के रास्ते?

इस विषय पर अमरीका के उत्तरी केरोलीना राज्य के कई विश्वविद्यालयों ने शोध किया। एक टीम ने पता लगा लिया कि ज़्यादातर नाक के रास्ते से यह वायरस फेफड़ों में पहुंचता है। यह शोध जर्मनी की डेर स्टैंडर्ड मैगज़ीन में छपा है।

स्रोतः अलजज़ीरा+इंडिपेंडेंट+डोएचेवेले+वेबसाइटें