इस्राईली टीवी चैनल कान ने अपनी रिपोर्ट में उच्च सुरक्षा व राजनैतिक सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है कि इस्राईल ने फ़िलिस्तीनी प्रशासन को भी सूचित कर दिया है कि इस्राईल से पूछे बग़ैर फ़िलिस्तीनी प्रशासन को अपने सुरक्षा बलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का अधिकार नहीं है। टीवी चैनल का कहना है कि फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने अपने सुरक्षा बलों को आदेश दिया है कि वह किसी भी इलाक़े में इस्राईली सैनिकों की किसी भी प्रकार की गतिविधियों में कोई हस्तक्षेप न करें। न को भी सूचित कर दिया है कि इस्राईल से पूछे बग़ैर फ़िलिस्तीनी प्रशासन को अपने सुरक्षा बलों को एक स
इसका मतलब यह है कि इस्राईल महमूद अब्बास पर दबाव डालने में कामयाब हो गया है और उन्हें वेस्ट बैंक के इलाक़े इस्राईल में शामिल कर लिए जाने का समर्थन करने पर तैयार कर रहा है या फिर इस्राईल इस कोशिश में है कि महमूद अब्बास को भी उसी तरह बदनाम कर दे जैसे उसने यासिर अरफ़ात के साथ किया था।
इस्राईल ने यासिर अरफ़ात के रामल्ला से बाहर निकलने पर रोक लगा दी थी और वह उस समय तक वहीं क़ैदियों की तरह रहे जब तक कि उन्हें इस्राईल ने ज़हर नहीं दिलवा दिया। ज़हर देने के बाद इस्राईल ने यासिर अरफ़ात को फ़्रांस जाने की अनुमति दी थी और वहीं उनका निधन हो गया था। इस्राईल का कहना है कि यासिर अरफ़ात के क़त्ल में उसका कोई हाथ नहीं था।
इसके अलावा इस्राईल के टीवी चैनल 13 ने सामरिक मामलों के विशेषज्ञ एलोन बिन दावीद की एक डिबेट दिखाई जिसमें विशेषज्ञ ने महमूद अब्बास के भविष्य के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि महमूद अब्बास के इर्द गिर्द फ़िलिस्तीनी प्रशासन के कई अधिकारी हैं जो यह ओहदा संभालने के लिए तैयार हैं इनमें इंटैलीजेन्स प्रमुख माजिद फ़रज, महमूद अब्बास के सहायक अलआलूल इसी तरह हुसैन शैख़, जिबरील रजूब और साएब उरैक़ात प्रमुख हैं।
बिन दावीद ने कहा कि यह वह लोग हैं जो इस्राईल के ख़िलाफ़ सशसत्र बग़ावत के विरोधी हैं और उनका मानना है कि इस्राईल से बातचीत करके मामलों को हल करना चाहिए।
इन अधिकारियों को यह डर भी है कि कहीं चुनाव में वेस्ट बैंक के इलाक़े में भी हमास संगठन को विजय न मिल जाए जैसा 2006 के चुनाव में हुआ था।
स्रोतः रायुल यौम