31 मई 2020 - 13:42
आयत क्या कहती हैं? जिन लोगों के सुधार और ईमान की आशा नहीं होती उन के लिए अत्याचार, पतन और तबाही का मार्ग प्रशस्त करता है।

पिछले लोगों की उत्तराधिकारी बनने वाली जातियों को उनके इतिहास से पाठ सीखना चाहिए और जान लेना चाहिए कि यदि वे भी पिछले लोगों के मार्ग पर चले तो उन ही जैसा अंत उनकी भी प्रतीक्षा कर रहा है।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 13 और 14 का अनुवादः

और निश्चित रूप से हम ने तुम से पहली वाली जातियों का विनाश कर दिया जब उन्होंने अत्याचार किया और यद्यपि पैग़म्बर उन के लिए स्पष्ट निशानियां ले कर आए किन्तु वे ईमान न लाए। इस प्रकार हम अपराधियों को दंडित करते हैं। फिर हमने तुम को उन के पश्चात धरती पर उन का उत्तराधिकारी बना दिया ताकि देखें कि तुम किस प्रकार कर्म करते हो।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

यद्यपि ईश्वर पापी लोगों को अवसर देता है और इस संसार में उनका विनाश नहीं करता किन्तु ऐसे समाजों और समुदायों के साथ उसका व्यवहार भिन्न होता है जिन के अधिकांश लोग अत्याचारी होते हैं, ऐसे समुदायों और समाजों को ईश्वर तबाह कर देता है।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. जिन लोगों के सुधार और ईमान की आशा नहीं होती उन के लिए अत्याचार, पतन और तबाही का मार्ग प्रशस्त करता है।

  2. लोगों का भविष्य स्वयं उन्हीं के हाथ में होता है और उनके अच्छे बुरे कर्म ही उनका भविष्य निर्धारित करते हैं।

  3. यदि हमें शक्ति और शासन प्राप्त हो जाए तो हमें जान लेना चाहिए कि ईश्वर हमारी भी परीक्षा लेगा और सभी लोग उसकी दृष्टि में एक समान हैं।