सऊदी अरब में अमरीका के पूर्व राजनयिक रहे जे माइकल स्प्रिंगमैन ने ईरान की इस्लामी क्रांति फ़ोर्स आईआरजीसी के एक वरिष्ठ कमांडर के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही।
आईआरजीसी के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल यदुल्लाह जवानी ने फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी सेना के युद्ध अभ्यास की निंदा करते हुए कहा था कि क्षेत्र में अमरीका की सैन्य उपस्थिति का युग समाप्त होने वाला है।
स्प्रिंगमैन का कहना थाः ईरानी जनरल यह बात कहने में थोड़ा आशावादी हैं कि अमरीकियों को इस क्षेत्र से वापस चले जाना चाहिए। मेरा मानना है कि जब तक संभव होगा, अमरीकी इस इलाक़े में बने रहेंगे। जब तक उन्हें यह विश्वास है कि वे यहां अपनी मनमानी कर सकते हैं और उन्हें इस बात का यक़ीन नहीं हो जाता कि ईरान, इराक़ और सीरिया की तरह एक शक्ति नहीं रहा है, वे यहां से जाना नहीं चाहेंगे।
शुक्रवार को प्रेस टीवी से बात करते हुए पूर्व अमरीकी राजनयिक का कहना था कि यह बात मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि अगर अमरीका ने ईरान पर हमला किया तो उन्हें पछताने का भी मौक़ा नहीं मिलेगा, इसलिए कि ईरानी सेना देश पर किसी भी हमले स्थिति में जवाबी कार्यवाही के लिए तैयार है। और मुझे लगता है कि अमरीकी इसके लिए बेताब हैं।
उन्होंने आगे कहाः लेकिन मुझे लगता है कि अमरीकी सेना और प्रशासन में अभी भी कुछ ऐसे समझदार लोग हैं, जो इस घातक क़दम के परिणामों से वाक़िफ़ हैं। वेनेज़ुएला के लिए तेल ले जाने वाले ईरानी तेल टैंकरों की घटना ने यह साबित कर दिया है कि अब अमरीकी पूरे विश्व पर निंयत्रण नहीं कर सकते।
जनरल जवानी के बयान की पुष्टि करते हुए स्प्रिंगमैन ने कहा, जनरल जवानी का यह कहना कि अमरीकियों ने ख़ुद को रस्सी के अंतिम छोर तक पहुंचा दिया है, सही है, इसिलए कि क्षेत्र में आक्रामकता जारी रखने के लिए अब उनके पास पर्याप्त सैनिक, नाविक और मरीन नहीं हैं, अब उन्हें घर लौट जाना चाहिए और यह उनके हित में है। वायरस के इस दौर के बाद अमरीकियों को यह अहसास ज़रूर होगा कि उन्हें अब इस क्षेत्र में नहीं होना चाहिए, इसलिए कि फ़ार्स खाड़ी अमरीका की कोई झील नहीं है।