इस मोर्चे का विस्तार पर अब पश्चिमी एशिया के इलाक़े से बढ़कर लैटिन अमेरिका तक जा पहुंचा है।
ईरान से वेनेज़ोएला जाने वाले पांच तेल टैंकरों में केवल पेट्रोलियम पदार्थ नहीं है बल्कि वेनेज़ोएला की तेल रिफ़ाइनरियों की मरम्मत के लिए विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद है। इस पूरी घटना में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के लिए भी एक संदेश है कि अब अमरीकी नाकाबंदी बेअसर हो चली है और एक के बाद एक इस रणनीति को नाकामी का मुंह देखना पड़ रहा है।
अमरीकी सरकार ने फ़ार्स खाड़ी में अपनी घटक सरकारों के माध्यम से ईरान को धमकी दी थी कि वह ईरान के तेल टैंकरों को वेनेज़ोएला पहुंचने से रोकेगी चाहे इसके के लिए ताक़त का इस्तेमाल क्यों न करना पड़े मगर ईरानी नेतृत्व ने अमरीका की इस धमकी पर कोई ध्यान ही नहीं दिया और अब देखिए कि ईरानी तेल टैंकरों का कारवां समंदरों और महसागरों से गुज़रता हुआ वेनेज़ोएला जा पहुंचा है। अमरीका ने आंखें दिखाईं मगर आंख ही दिखाता रहा गया, कुछ कर नहीं सका।
यह ईरान और अमरीका के बीच शक्ति के संतुलन में एक बड़ा बदलाव हुआ है। ईरान ने यह पैग़ाम दिया है कि फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में अमरीका के सारे जहाज़ और युद्धपोत उसके मिसाइलों के निशाने पर हैं। यदि अमरीकी प्रशासन को इस स्थिति का भरपूर एहसास न होता तो वह ज़रूर ईरानी तेल टैंकरों को वेनेज़ोएला पहुंचने से रोकता।
ईरान ने यह क़दम उठाकर प्रतिरोध मोर्चे में शामिल देशों और संगठनों को भी संदेश दिया है कि ईरान कभी अपने घटकों को अकेला नहीं छोड़ता बल्कि अमरीका और इस्राईल का ख़तरा भी हो तो उसका डटकर मुक़ाबला करता है।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई की वेबसाइट ने एक पोस्टर प्रकाशित किया है जिसमें प्रतरोध मोर्चे की महत्वपूर्ण हस्तियों को दिखाया गया है। इस पोस्टर में हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह, हमास के नेता इसमाईल हनीया, यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता अब्दुल मलिक अलहौसी, फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी संगठन के प्रमुख ज़ियाद नुख़ाला, क़ुद्स के मुफ़्ती मुहम्मद अहमद हुसैन मस्जिदुल अक़सा के प्रांगड़ में नमाज़ अदा करते दिखाई दे रहे हैं। यह पोस्टर इसी सच्चाई को प्रमाणित करता है और साथ ही भविष्य के एजेंडे को भी बयान करता है। इस एजेंडे में बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी पहली प्राथमिकता है। इस समय जब वेनेज़ोएला के तट पर ईरान के तेल टैंकर पहुंच रहे हैं तो इस पोस्टर का प्रकाशित किया जाना संयोग नहीं है।
यह बात भी महत्वपूर्ण थी कि यह सारे तेल टैंकर स्वेज़ नहर से गुज़र कर गए हैं इसका मतलब यह है कि मिस्री सरकार ने भी ग्रीन सिगनल दिया है और अमरीका की नाकाबंदी पर उसने अमल नहीं किया, यह भी बहुत बड़ा बदलाव है।
ईरान ने कठिन समय में वेनेज़ोएला को अकेला नहीं छोड़ा। इसी तरह वेनेज़ोएला के पूर्व राष्ट्रपति होगो चावेज़ ने भी अमरीका के भारी दबाव के बावजूद हमेशा ख़ुद को ईरान के क़रीब रखा। ईरान ने जवाब में अमरीका से युद्ध का जोखिम उठाकर वेनेज़ोएला का साथ दिया है।
यह भी बहुत बड़ी बात है कि ईरान पहले अपनी ज़रूरत के पेट्रोकेमिकल पदार्थ दूसरे देशों से आयात करता था मगर प्रतिबंधों का सामना करते करते इस तरह आत्म निर्भर हो गया कि विदेशों को पेट्रोकेमिकल पदार्थ निर्यात कर रहा है। ईरान ने वर्ष 2018 में 11 नई रिफ़ाइनरियां बना ली हैं।
आख़िर में हम कहना चाहते हैं कि ईरान ने ट्रम्प का घमंड चकनाचूर कर दिया, अमरीका को उसके इलाक़े में जाकर ललकारा और हराया है। रोचक संयोग यह है कि इस वक़्त ट्वीटर भी ट्रम्प की साख और विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है और यूज़र्स को ट्रम्प द्वारा दी गई झूठी जानकारियों से बचने की सलाह दे रहा है।
क्या ट्रम्प ही हमेशा फ़ेक न्यूज़ की रट नहीं लगाए रहते थे? आज ट्रम्प फ़ेक न्यूज़ के सबसे बड़े उत्पादक बन गए हैं।
ईरान से वेनेज़ोएला के लिए जहाज़ों के कारवां जाते रहेंगे और अमरीका की शिकस्त का सिलसिला लंबा होता रहेगा। आने वाले दिनों में और भी बहुत कुछ चौकांने वाली बातें नज़र आएंगी।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार