न्यूजर्सी स्थिति प्रिंसटन विश्वविद्यालय में हुए हालिया शोध में दावा किया गया है कि उमस या गर्मी के मौसम में सार्स-सीओवी-2 और कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार कम नहीं होगा।
साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि नियंत्रण उपायों के बिना वायरस अतिसंवेदनशील लोगों की एक विशाल आबादी में आसानी से फैल सकता है।
शोध में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के प्रसार को मौसमी और भौगोलिक जलवायु भिन्नता भी धीमा नहीं कर सकती।
शोध में कहा गया है कि प्रकोप के उमस या नमी भरे मौसम में अधिक मज़बूत होने की संभावना है जबकि गर्मी का मौसम महामारी के प्रसार को सीमित नहीं कर पाएगा।
शोधकर्ताओं के मानना है कि जिस गति से यह महामारी फैल रही है उसके आधार पर जलवायु की स्थिति केवल संक्रमण की वर्तमान दर में आंशिक कमी ला सकती है जबकि आमतौर पर किसी भी महामारी के प्रसार और प्रभाव पर जलवायु का प्रभाव होता है।
शोध के लेखक बेकर ने कहा कि ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया सहित दक्षिणी गोलार्ध के अन्य देशों में वायरस का तेज़ी से प्रसार हुआ है जहां गर्मी के मौसम में वायरस शुरू हुआ था।
उनका कहना था कि इससे पता चलता है कि गर्म स्थिति महामारी को रोक नहीं सकती है।