13 मई 2020 - 12:36
वैट लगाने के बाद अब अगला कौन सा टैक्स लगाने जा रही है सऊदी सरकार? क्या इन उपायों से भीषण आर्थिक संकट को रोक पाएंगे बिन सलमान?

सऊदी सरकार ने वैट की मात्रा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी और सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता रोक दिया जो 226 डालर माहवार था।

यह दरअस्ल इशारा है कि सरकार अब और भी कड़े क़दम उठाने जा रही है और इसका एलान सऊदी वित्त मंत्री मुहम्मद अलजदआन ने कर भी दिया है। यह सब सऊदी अरब के बजट घाटे की भरपाई के लिए किया जा रहा है जो 122 अरब डालर तक पहुंच गया है।

तेल की क़ीमतें बहुत गिर गई हैं और सऊदी सरकार ने तेल के उत्पादन में 40 लाख बैरल की कमी कर दी है अब यह देश रोज़ाना 70 लाख बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है। कोशिश यह है कि तेल की क़ीमतें बेहतर हो जाएं क्योंकि कोरोना वायरस के कारण तेल की डिमांड सारी दुनिया में घट गई है जिसकी वजह से क़ीमतों में गिरावट आई है।

इस समय जो भयानक आर्थिक संकट है उससे बाहर निकलने के लिए सऊदी अरब के पास दो ही रास्ते हैं।

पहला रास्ता यह है कि नियोम आर्थिक परियोजना जैसी सारी परियोजनाओं को रोका जाए, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से क़र्ज़ा लिया जाए और सऊदी अरब के विदेशी मुद्रा भंडार से रक़म निकाली जाए।

दूसरा रास्ता यह है कि नागरिकों पर टैक्स लगाया जाए। सऊदी सरकार ने एक तो वैट तीन गुना बढ़ा दिया है और महंगाई भत्ता रोक दिया है और अब तेल, बिजली, गैस और दूरसंचार की दरों में बढ़ोत्तरी की जा रही है। चावल, शकर, तेल, आंटे और ईधन पर दी जाने वाली सब्सिडी कम करने पर विचार किया जा रहा है।

सऊदी अरब के सालाना बजट को तीन बहुत गंभीर झटके लगे हैं। एक तो गैर पेट्रोलियम आमदनी जो बजट का लगभग 20 प्रतिशत है पूरी तरह रुक गई है। तेल से होने वाली आमदनी में दो तिहाई की कमी आ गई है। सऊदी अरब को हर साल उमरह और हज से लगभग 16 अरब डालर मिल जाते थे वह भी इस समय नहीं मिलेंगे। यहीं से यह बात समझ में आती है कि सऊदी वित्त मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों से 60 अरब डालर क़र्ज़ लेने की बात क्यों कही और यह इशारा क्यों दिया कि विदेशी मुद्रा भंडार से 32 अरब डालर निकाले जाएंगे।

यह बात साफ़ है कि सऊदी नागरिक को आर्थिक कटौती की नीतियों का बुरी तरह निशाना बनना पड़ेगा। हो सकता है कि सऊदी सरकार अब इनकम टैक्स, सफ़र पर टैक्स सहित बहुत से टैक्स लगाए क्योंकि सरकार धीरे धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

इन क़ुरबानियों के बदले सऊदी नागरिक को क्या इनाम मिलेगा यह अब तक साफ़ नहीं है। इनाम से तात्पर्य राजनैतिक और सामाजिक अधिकार और देश के स्ट्रैटेजिक मामलों और देश के संचालन में सऊदी नागरिक को भागीदारी देना है।

सऊदी अरब को अब भी सबसे बड़ा जानी और माली नुक़सान यमन युद्ध से हो रहा है जबकि यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन की ताक़त कम होने के बजाए लगातार बढ़ रही है।

आने वाले दिन, महीने, और साल बहुत कठिन होंगे। सऊदी वित्त मंत्री जदआन ने अलअरबिया टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए जो कटौतियां करने और टैक्स बढ़ाने की बात कही है वह तो महज़ आधी हक़ीक़त है बल्कि शायद उससे भी कम।

स्रोतः रायुल यौम