दबीरुल इस्लाम चौधरी ने पहली जनवरी 1920 को भारत के उस इलाक़े में जन्म लिया था, जो अब बांग्लादेश के नाम से एक स्वाधीन देश है।
चौधरी ने 1957 में अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ने के लिए लंदन का रुख़ किया था। तालीम पूरी होने के बाद वे वहीं बस गए।
कैप्टन टॉम मूर से प्रेरित होकर कि जिन्होंने कोरोना के ख़िलाफ़ ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के लिए दुनिया भर से 4 करोड़ 10 लाख डॉलर इकट्ठे किए हैं, चौधरी ने 26 अप्रैल को अपना यह अभियान शुरू किया था।
चौधरी ने कम्यूनिटी गार्डन में चलह क़दमी करते हुए ही कुछ ही दिनों में एक बड़ी रक़म इकट्ठा कर ली और वे अपने इस मिशन को रमज़ान के ख़त्म होने तक जारी रखना चाहते हैं।
चौधरी एक मुसलमान हैं और 100 साल की उम्र होने के बावजूद, पवित्र रमज़ान के दौरान रोज़ा रखते हैं। वे अब तक 92,700 डॉलर की रक़म जमा कर चुके हैं।
ब्रिटेन में कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन लागू है, इसलिए वे पिछले दो महीनों से अपने घर ही में रह रहे हैं।
उन्होंने फ़ंड इकट्ठा करने वाले अपने पेज (JustGiving) पर लिखा हैः अगर तुरंत कोई क़दम नहीं उठाया गया तो 50 करोड़ लोग ग़रीबी और भुखमरी का शिकार हो जायेंगे। ख़ास तौर पर बांग्लादेश और दूसरे ग़रीब देशों के लोग अधिक प्रभावित होंगे। बच्चे और ग़रीब परिवार भुखमरी का शिकार हो जायेंगे।
ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन, इटली को पीछे छोड़कर यूरोप का कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया है। ब्रिटेन में 32,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
बांग्लादेश में कोविड-19 से अब तक 183 लोगों की मौत हो चुकी है।