29 अप्रैल 2020 - 11:20
भारत में मुसलमानों को बचाना है तो भारत को ब्लैक लिस्ट करके अधिकारियों पर वीज़ा बैन लगाया जाए, USCIRF

अमरीका की एक सरकारी संस्था ने अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और उनकी धार्मिक आज़ादी पर हो रहे हमलों के कारण, भारत को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की है।

दुनिया भर में धार्मिक आज़ादी की निगरानी करने वाली संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीज़यस फ़्रीडम (यूएससीआईआरएफ़) ने प्रधान मत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार धार्मिक आज़ादी को कुचले जाने पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत को उन 14 देशों की सूचि में डालने का आहवान किया है, जहां धार्मिक आज़ादी नहीं है।

अमरीका की यह संस्था सरकार को सुझाव देती है, नीतियों का निर्धारण नहीं करती है, इसलिए ऐसी संभावना कम ही है कि अमरीका से निकट हो रहे भारत पर अमरीका कोई दबाव बनाएगा।

यूएससीआईआरएफ़ ने अपनी सालाना रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि भारत को उन 14 देशों के साथ रखा जाए जहां ख़ास चिंताएं हैं और अगर भारत अपने रिकॉर्ड में सुधार नहीं करता है तो उस पर प्रतिबंध लगा दिए जाएं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में भारत में धार्मिक आज़ादी में नाटकिय गिरावट आई है और अल्पसंख्यकों पर हमलों में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों पर वीज़ा प्रतिबंध सहित नई दिल्ली के ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्यवाही की ज़ोरदार मांग की गई है, इसी के साथ वाशिंगटन से कहा गया है कि वह उन सामाजिक समूहों का वित्त पोषण करे, जो नफ़रत फैलने वाले भाषणों पर नज़र रखते हैं।

अमरीकी संस्था का कहना है कि पिछले साल दोबारा चुनाव जीतने वाली मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के संरक्षण में मुसलमानों के उत्पीड़न में वृद्धि हुई है, उनके घरों और मस्जिदों पर हमलों के लिए उकसाया गया है तथा उनके ख़िलाफ़ बयानबाज़ी करने वालों को छूट दी गई।

रिपोर्ट में गृह मंत्री अमित शाह के बयानों का हवाला दिया गया है, जिन्होंने मुस्लिम प्रवासियों को "दीमक" बताया था और उनके साथ भेदभाव करने वाला नागरिकता का विवादित क़ानून पारित करवाया था, जिसका देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था।

मदी सरकार द्वारा भारत प्रशासित जम्मूद कश्मीर को विशेष अधिकार प्रदान करने वाली धारा 370 को ख़त्म करने की आलोचना की गई है और फ़रवरी के महीने में मुसलमानों के ख़िलाफ़ दिल्ली में भीषण दंगों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

यूएससीआईआरएफ़ ने 28 अप्रैल को ट्वीट करके कहा है कि भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) से करोड़ों मुसलमानों को डिटेंशन सैंटरों में डाले जाने और उनकी नागरिकता छीन लिए जाने का ख़तरा है, जब सरकार पूरे देश में एनआरसी लागू करेगी।

भारत सरकार ने जो काफ़ी समय से कमीशन की टिप्पणियों से असहज महसूस करती रही है, तुरंत उसकी रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग स्रिवास्तव का कहना था कि भारत के ख़िलाफ़ भेदभाव करने वाली इस टिप्पणी में कुछ नया नहीं है। लेकिन इस बार उसके ग़लत दावों का स्तर एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है।

इसमें कोई शक नहीं है कि भारत में हिंदुत्ववादी संगठन मुसलमानों के ख़िलाफ़ सुनियोजित हिंसा कर रहे हैं और उन्हें मोदी सरकार खुली छूट दे रही है। ऐसे टीवी चैनलों को सरकार प्रमोट कर रही है, जो समाज में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत का ज़हर घोल रहे हैं।

मार्च में भारत में कोरोना वायरस महामारी की शुरूआत का आरोप भी मुसलमानों के सिर मढ़ दिया गया, जिसके बाद देश भर में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत की एक नई लहर शुरू हो गई। पुलिस पर भी जानबूझकर मुसलमानों को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं।

विश्व समुदाय और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भारत में हो रहे मुसलमानों के उत्पीड़न को अगर नज़र अंदाज़ किया तो दुनिया अब तक का सबसे भयानक मानवीय संकट देखेगी।