विशेषज्ञों के अपने अनुमान थे और कई लोग धूल में लठ चला रहे थे। भ्रम की यह स्थिति 18 नवंबर तक जारी रही, जब लोगों ने प्योंगयांग का दौरा करने वाले मंगोलियाई प्रतिनिधिमंडल के साथ हाथ मिलाते हुए किम को ज़िंदा देखा। उनकी मृत्यु की ख़बरें, पूर्ण रूप से अफ़वाह साबित हुईं।
ऐसा ही कुछ सोमवार को उस समय हुआ, जब सीएनएन ने अमरीकी ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से दावा किया कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन एक ऑप्रेशन के बाद, गंभीर ख़तरे में हैं। उसके बाद अचानक, सोशल मीडिया पर किम के ब्रेन-डेड, या कोमा में होने और कोरोना वायरस से संक्रमित होने की ख़बरें सोशल मीडिया पर फैलने लगीं। डेली एनके की रिपोर्ट के अनुसार, किम सफल ऑप्रेशन के बाद, तेज़ी से स्वस्थ हो रहे हैं।
उत्तर कोरिया के घटनाक्रमों पर पैनी नज़र रखने वाले शोधकर्ता म्योंग-ह्यून का कहना है कि उत्तर कोरिया पर नज़र रखने वाले हममें से अधिकांश लोग, न केवल मीडिया बल्कि विदेश नीति विशेषज्ञ भी यह जानते हैं कि पिछले कुछ महीनों से उत्तर कोरिया के बारे में बहुत कम ही कोई ख़बर निकलकर आ रही है, इसलिए हमें ऐसा लग रहा है कि प्योंगयांग में कुछ घट रहा है, और हमने यह नतीजा निकाल लिया।
कोरियाई नेता की मौत हो गई है या वह ज़िंदा हैं, सर्जरी के बाद उनकी हालत ठीक हो रही है या बहुत नाज़ुक है या वह बिल्कुल ठीक हैं, इस बारे में अभी तक कोई सूचना नहीं है, इसलिए प्योंगयांग द्वारा आधिकारिक रूप से घोषणा करने से पहले कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
हां इस समय अगर हम कोई बात पूरे विश्वास से कह सकते हैं तो वह यह है कि उत्तर कोरिया के संस्थापक और अपने दादा किम इल सुंग के जन्मदिवस के के रूप में 15 अप्रैल को मनाए जाने वाले सूर्य दिवस के अवसर पर किम सामने नहीं आए।