पिछले हफ़्ते लगभग एक दर्जन ईरानी युद्धक नौकाओं ने अमरीकी नैवी और कोस्ट गार्ड के युद्धपोतों को घेर लिया था। फ़ार्स खाड़ी में इस प्रकार की घटनाएं कोई नई बात नहीं है जहां ईरान और अमरीका की नौसेनाएं एक दूसरे के आमने सामने हैं। पिछले वर्षों में भी इस प्रकार की घटनाएं कई बार हुईं।
मगर बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का एक ट्वीट आया कि मैंने अमरीकी नौसेना को आदेश दिया है कि अगर समुद्र में हमारे जहाज़ों को ईरानी नौकाओं ने फिर परेशान किया तो उन पर हमला कर दिया जाए। ट्रम्प का यह धमकीपूर्ण ट्वीट बिलकुल ग़ैर ज़रूरी और भड़काऊ है। क्योंकि अगर इस प्रकार कोई भी टकराव हुआ तो वह बड़ा विध्वंसकारी होगी।
ट्रम्प के इस ट्वीट के तत्काल बाद तेल की क़ीमतें बढ़ने लगीं। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट आयल के वायदा कांट्रैक्ट 13.49 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गए जबकि इससे पहले क़ीमतें ज़ीरो से 37 डालर नीचे तक पहुंच गई थीं। ब्रेंट तेल की क़ीमत 20.53 डालर हो गई। जब भी जंग का ख़तरा होता है तो तेल की क़ीमतें बढ़ती हैं।
सऊदी अरब की आरामको कंपनी के प्रतिष्ठानों पर सितम्बर 2019 में मिसाइल और ड्रोन हमले हुए। इन हमलों के बारे में ईरान पर आरोप लगाया गया कि उसने यमन के हूती संगठन की मदद से किए हैं। इससे पहले मई 2019 में हुरमुज़ स्ट्रेट के इलाक़े में तेल टैंकरों में धमाके हुए। इन धमाकों के लिए भी ईरान पर आरोप लगाया गया।
ईरान ने बार बार अमरीका और उसके अरब घटकों को संदेश दिया है कि यदि अमरीका ने ग्लोबल मार्केट तक ईरान की पहुंच पर अंकुश लगाने की कोशिश की तो वह हुरमुज़ स्ट्रेट को बंद कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रम्प एक समय ईरान का मुक़ाबला सैन्य बल से करने की बात कर रहे थे मगर फिर उनके सैन्य सलाहकारों ने समझाया कि ईरान से टकराव हुआ तो अमरीका ही नहीं सारी दुनिया की इकानोमी संकट में पड़ जाएगी।
यह तो पहले की बात है मगर अब कोरोना वायरस की महामारी ने दुनिया भर की इकानोमी बंद करवा दी और तेल की डिमांड बहुत कम हो गई है जबकि उत्पादन अपने रिकार्ड स्तर पर है। इसी का नतीजा है कि क़ीमतों में भारी गिरावट आ गई है। अब हालत यह है कि अमरीका की तेल इंडस्ट्री बहुत गंभीर संकट में है और इस इंडस्ट्री का अमरीकी इकानोमी में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।
तेल उत्पादन में 10 मिलियन बैरल कटौती पर सहमति बनी है लेकिन इसके बावजूद 17 से 19 मिलियिन बैरल तेल, बाज़ार में अतिरिक्त तेल के रूप में मौजूद है। इसका मतलब यह है कि अभी तेल के उत्पादन में और भी कटौती होनी चाहिए मगर कोई भी देश अमरीका की शेल आयल इंडस्ट्री को बचाने के लिए अपने तेल उत्पादन में कटौती के लिए तैयार नहीं है। इसलिए कि अमरीका का शेल आयल दुनिया के तेल के बाज़ारों में एक्स्ट्रा सप्लाई के लिए मुख्य ज़िम्मेदार माना जाता है। अब अगर ईरान के साथ युद्ध शुरू हो जाता है तो और हुरमुज़ स्ट्रेट बंद हो जाता है तो तेल की सप्लाई रुक जाएगी और अमरीकी तेल इंडस्ट्री को इसका फ़ायदा मिल जाएगा जो भारी नुक़सान में चल रही है।
मगर यह भी सोचने की बात है कि अमरीका ने कितनी ही तैयारी क्यों न कर ली हो ईरान से लड़ाई हुई तो कितना नुक़सान अमरीका और उसके घटकों को पहुंचेगा इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। यह जंग शायद अमरीका की तेल इंडस्ट्री को बचा लेगी लेकिन अमरीकी इकानोमी को ध्वस्त कर देगी। अलबत्ता यह अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव का साल है तो हो सकता है कि अमरीकी सरकार को ईरान से जंग आकर्षक लग रही हो।
स्काट रिटर
पूर्व अमरीकी मैरीन इंटैलीजेन्स अफ़सर