भारत के प्रसिद्ध लेखिका और राजनीतिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कोरोना के संक्रमणकाल का इस्तेमाल हिन्दू और मुसलमानों के बीच तनाव को भड़काने के लिए कर रही है। एक न्यूज़ साइट से बातचीत में अरुंधति रॉय ने कहा कि हिन्दू राष्ट्रवादी सरकार अपनी इस कथित रणनीति को "इस बीमारी के साथ जोड़ कर कुछ और बनाने की कोशिश में है जिसे लेकर विश्व को अपनी नज़र बनाए रखनी चाहिए।" रॉय ने आगे चेतावनी भरे सुर में कहा कि, भारत की हालिया स्थिति को देखकर यह कहा जा सकता है कि, यह देश जनसंहार की ओर बढ़ रहा है। रॉय ने कहा, "मुझे लगता है कि कोविड-19 के चलते भारत के बारे में ऐसी कई चीज़ें उजागर हो गई हैं जो हम पहले से जानते थे।" भारत के बारे में उनका कहना है कि "भारतीय समाज केवल कोविड-19 ही नहीं बल्कि नफ़रत और भूख का संकट झेल रहा है।"
उल्लेखनीय है कि, भारत के करीब 1 अरब 30 करोड़ लोग इस समय छह सप्ताह लंबे देशव्यापी लॉकडाउन में हैं। जॉन्स हॉपकिन्स इंस्टीट्यूट के अनुसार, दुनिया के दूसरे सबसे बड़ी आबादी वाले देश में अब तक कोरोना वायरस के 18,658 मामले सामने आए हैं और इसके कारण 592 जानें गई हैं। भारत को अकसर उन देशों में गिना जाता है जहां आधिकारिक आंकड़ों और संक्रमितों की सही संख्या में काफ़ी अंतर होता है। रॉय ने कहा, "मुसलमानों के खिलाफ इस तरह की घृणा सामने आने से पहले हमने दिल्ली में हुआ जनसंहार देखा था, जो कि लोगों के मुस्लिम-विरोधी विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करने का नतीजा था।” रॉय ने कहा, "कोविड-19 की आड़ में सरकार युवा छात्रों को गिरफ्तार कर रही है, वकीलों, वरिष्ठ संपादकों, एक्टिविस्टों और बुद्धिजीवियों के ख़िलाफ़ के लगातार केस दायर किए जा रहे हैं और कुछ को तो हाल ही में जेल में डाला गया है।"
इस बीच कुछ जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार कोरोना वायरस का इस्तेमाल कुछ इस तरह से कर रही है जैसे वह किसी मरीज़ को नहीं बल्कि किसी आतंकवादी को पकड़ रही है। मोदी सरकार के इस एकपक्षीय अभियान में भारत की सरकार समर्थक मीडिया पूरी तरह दिल्ली सरकार का साथ देती नज़र आ रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में अरुंधति रॉय का कहना है कि, "जिस आरएसएस संगठन (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से खुद मोदी आते हैं और जो बीजेपी की मातृ संस्था है, उसका हमेशा से कहना रहा है कि भारत को एक हिन्दू राष्ट्र होना चाहिए।” रॉय ने बताया कि "इसके विचारक भारत के मुसलमानों को जर्मनी के यहूदियों जैसा मानते हैं और अगर आप देखें कि जिस तरह से वे कोविड-19 का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ये वैसा ही है जैसा टाइफस का इस्तेमाल यहूदियों के ख़िलाफ़ उन्हें अलग थलग करने और कलंकित करने के लिए हुआ था।"
कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो विश्व के दूसरे देशों की तुलना में भारत में कोरोना वायरस का जिस स्तर पर क़हर देखने को मिलर रहा है उसे बहुत भयावह नहीं कहा जा सकता और साथ ही ईश्वर से भी यह प्रार्थना है कि भारत को इस घातक वायरस से बचाए रखे। इसका कारण यह है कि जिस देश में पहले से ही भूख और नफ़रत का वायरस इतना फैल चुका हो कि जहां बेगुनाह, युवक तबरेज़ अंसारी, पालघर में साधुओं और दादरी में अख़लाक़ जैसे लोगों को भीड़ नोच-नोच कर मार दे रही है। वहां कोरोना वायरस ने अगर धर्म के नाम पर अपना क़हर बरसाना आरंभ कर दिया तो फिर अरुंधति राय का जनसंहार का दावा सच में बदल जाएगा, जिसको कोई भी भारतीय नहीं चाहेगा।