आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पंद्रह शाबान के अपने भाषण में रमज़ान के पवित्र महीने में समाज के ग़रीबों व वंचितों से समरसता दर्शाने और उनकी मदद करने की आवश्यकता पर बल दिया था जिसके बाद इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी के कमांडर जनरल हुसैन सलामी के आह्वान पर इस मानवताप्रेमी काम में समन्वय, सहयोग और भागीदारी के लिए विभिन्न संस्थाओं की एक बैठक तेहरान में आयोजित हुई। इस बैठक में जनरल सलामी के अलावा ईरान के उद्योग मंत्री रज़ा रहीमी, वंचितों के फ़ंड के प्रमुख परवेज़ फ़त्ताह, स्वयं सेवी बल के प्रमुख ब्रिगेडियर ग़ुलाम रज़ा सुलैमानी और इमाम ख़ुमैनी सहायता समिति के प्रमुख मुर्तज़ा बख़्तियारी ने भाग लिया। बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि हर स्थान पर ग़रीब व वंचित परिवारों की पहचान की जाए और उन तक लोगों की सहायता पहुंचाई जाए।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने भाषण में कहा था कि रमज़ान के पवित्र महीने में हमें समाज के ग़रीबों व वंचितों के साथ भाईचारे व समरसता का प्रदर्शन करना चाहिए और उनकी मानवीय मदद करनी चाहिए। इस तरह हमें यह सिद्ध करना चाहिए कि हम इमाम महदी अलैहिस्सलाम के चाहने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि महदवी समाज न्याय, सम्मान, ज्ञान, सहयोग व बंधुत्व से भरा होगा।
इस समय ईरान के सभी प्रांतों व शहरों में स्वयं सेवी बल के जवान मुहल्ले मुहल्ले जा कर ग़रीब व वंचित परिवारों के बारे में जानकारियां इकट्ठा कर रहे हैं और उन तक सहायता सामग्री पहुंचा रहे हैं। इस सामग्री में मुख्य रूप से दालें, चावल, तेल, शकर, स्पेगेडी, गोश्त व मुर्ग़ इत्यादि शामिल हैं। इसी तरह इमाम रज़ा अलैहिस्सालम के रौज़े की ओर से दसियों टीमें मुहल्ले मुहल्ले जा कर दुकानदारों से अत्यंत ग़रीब परिवारों के बारे में जानकारियां इकट्ठा कर रही हैं और उनके उधार चुका रही हैं।
लोगों की मदद के लिए आगे आने वाले एक धर्मगुरू ने देश में कोरोना के रोगियों की बढ़ती संख्या की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि धार्मिक नेतृत्व विशेष कर वरिष्ठ नेता ने हमसे जो सिफ़ारिशें की हैं उनका पालन करें। ईश्वर की कृपा से ईरान का समाज अपने धर्मगुरुओं की बात मानने वाला है और लोग अपने भाइयों की मदद के लिए तन, मन, धन से तैयार हैं। कुछ लोग अनाज ला कर दे रहे हैं, कुछ तेल वितरीत कर रहे हैं, कुछ लोग अन्य आवश्यक सामान दे रहे हैं जबकि कुछ लोग आर्थिक मदद कर रहे हैं। ईश्वर ने चाहा तो जनता की मदद से कोरोना के संकट के बावजूद देश में रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान किसी भी परिवार को किसी भी तरह की आर्थिक कठिनाई और खाने पीने की समस्या नहीं होगी। (HN)