10 अप्रैल 2020 - 13:51
कोरोना से मरने वालों को जलाने और दफ्न न करने की सलाह के बीच पढ़ें यह बड़ी खबर! क्या इन्सान के मरने से उसके बदन में मौजूद कोरोना

कोरोना से मरने वालों को दफ्न किया जाए या जला दिया जाए? इस पर बहुत से लोग अलग अलग सलाह दे रहे हैं हालांकि इस्लाम में मुर्दे को किसी भी दशा में जलाना सही नहीं है।

सवाल यह है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस केवल जीवित कोशिकाओं में ही ज़िंदा रहता है तो फिर इन्सान के मरने के बाद भी उससे कैसा खतरा?

 कई अरब और मुसलमान देशों में भी लोग, कोरोना से मरने वालों को दफ्न किये जाने के खिलाफ आवाज़ सुनायी दे रही है। यह सब इस अफवाह की वजह से है कि कोरोना से मरने वाले इन्सान के बदन में वायरस होता है और इससे वह दूसरों में भी फैल सकता है।

 हर शरीर में अपना डीएनए होता है जो विकसित होने की क्षमता रखता है। इसी तरह वायरस का भी अपना डीएनए होता है लेकिन उसे जीवित रहने के लिए जीवित कोशिका की ज़रूरत होती है और वह एक जीवित कोशिका की मदद से ही बढ़ता है लेकिन जब कोशिका मर जाती है तो वायरस भी जम जाता है और कुछ घंटों या कुछ दिनों में वह पूरी तरह से खत्म हो जाता है, वायरस अगर जीवित कोशिकाओं में हों तो वह जीवित होते हैं और अगर बाहर तो फिर वह निर्जीव चीज़ होते हैं।


    कोरोना से मरने वाले व्यक्ति की कोशिकाएं एक घंटे  से कम समय में काम करना बंद कर देती हैं जिसके बाद उसमें फैले वायरस का विकास भी रुक जाता है और वह एसे ही हो जाते हैं जैसे दीवार या दरवाजे आदि  पर मौजूद वायरस जो कुछ ही घंटों में खत्म हो जाते हैं। इस लिए कोरोना से संक्रमित मर जाने वाले इन्सान की तुलना में कोरोना से संक्रमित जीवित इन्सान अधिक खतरनाक होता है। इस लिए कोरोना  से मरने वाले इन्सान की लाश, से ज़्यादा से ज्यादा उतना ही बचा जाना चाहिए जितना आप कोरोना के बीमार से बचते हैं या उसके साथ जो सतर्कता करते हैं और जब कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के शव को दफ्न कर दिया जाता है तो फिर सब खत्म हो जाता है इस लिए यह सोचना की लाश के अंदर मौजूद वायरस बढ़ता और फैलता है और आस पास के माहौल को भी प्रदूषित करता है, वैज्ञानिक दृष्टि से गलत है।  

    इसी तरह कोरोना से संक्रमित  व्यक्ति  सांस और थूक  आदि  से दूसरे को संक्रमित  कर सकता है मगर मर जाने वाले के लिए यह  संभव नहीं और फिर कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के शव को कफन के अलावा, प्लास्टिक में मज़बूती के साथ लपेटा जाता है जिससे वायरस बाहर नहीं निकल सकता। इस लिए यह चर्चा की गलत है कि कोरोना में मरने वाले व्यक्ति को दफन करना चाहिए या जलाया जाना चाहिए ? क्योंकि इससे कोरोना वायरस का कोई संबंध नहीं है और इस प्रकार की चर्चा आरंभ करने वालों का इरादा और नीयत कुछ और हो सकती है।