लेकिन यह फ़्लू भी हो सकता है और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि सारे लक्षण किसी एक बीमारी तक सीमित नहीं हैं। यानी यह भी हो सकता है कि आप ख़ुद को करोना वायरस का शिकार समझ रहे हों मगर यह मौसमी एलर्जी या इनफ़्लुएंज़ा हो।
ज़ुकाम, फ़्लू और कोरोना के कई लक्षण मिलते जुलते हैं और उनके अंतर को समझ पाना कठिन होता है। यह सब वायरस की बीमारियां हैं लेकिन इनके वायरस अलग अलग हैं।
स्पष्ट अंतर
मगर इन तीनों में एक स्पष्ट अंतर है कि कोरोना वायरस होने की स्थिति में सांस लेने में परेशानी होती है। यह लक्षण एसा है जो निमोनिया से पहले सामने आता है।
आम तौर पर फ़्लू या ज़ुकाम में सांस लेने में उस समय तक तकलीफ़ नहीं होती जब तक वह निमोनिया के स्टेज में न पहुंच जाए।
विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना और इनफ़्लुएंज़ा में बड़ी समानता है लेकिन इनफ़्लुएंज़ा में सांस लेने में वह तकलीफ़ नहीं होती जो कोरोना में हो जाती है।
कोरोना का पहला लक्षण बुख़ार है जिसके पांच या दस दिन बाद सांस लेने की तकलीफ़ शुरू होती है।
छींक कोई लक्षण नहीं
छींकना, नाक बहना, चेहरे में तकलीफ़ और आंखों में जलन यह सब एलर्जी या ज़ुकाम के लक्षण हैं जबकि कोरोना में यह लक्षण आम नहीं हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोरोना के लक्षणों में बुख़ार, थकावट, सूखी खांसी और सांस की तकलीफ़ है।