इराक़ में कोरोना के फैलाव के बाद फ्रांस ने भी इस देश से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया।
कोरोना के भयानक परिणाम हर दिन व्यापक हो रहे हैं। अब सैन्य दृष्टि से भी उसके परिणाम सामने आ रहे हैं। यह कोरोना का परिणाम ही है कि बहुत से पश्चिमी देश, मध्य पूर्व में अपनी सैनिक उपस्थिति को कम कर रहे हैं। बल्कि बहुत से विशेषज्ञों का तो यह कहना है कि कोरोना के डर से पश्चिमी देश पूरी तरह से यह इलाक़ा ही छोड़ सकते हैं।
यह एसी दशा में है कि मध्य पूर्व से पश्चिमी सैनिकों को भगाने के लिए बहुत बरसों से स्थानीय लोग संघर्ष कर रहे हैं। अमरीका तो कई अन्य क्षेत्रों से भी अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर मजबूर हो गया है।
कोरोना ने इसी तरह ब्रिटेन को भी इराक़ से अपने सैनिकों को वापस बुलाने पर मजबूर कर दिया है। अमरीका इराक़ में एक के बाद एक सैन्य छावनी खाली कर रहा है इसकी वजह अमराक ने कोरोना का फैलाव बताया है।
डेनमार्क ने भी कहा है कि वह इराक़ से अपने सैनिकों को वापस बुलाएगा, आस्ट्रेलिया ने भी यही एलान किया है। इन सब देशों के सैनिक अमरीकी नेतृत्व में इराक़ में तैनात हैं। अमरीका ने इराक़ की विभिन्न छावनियों से अपने सैनिकों को वापस बुला कर सब को तीन अलग अलग छावनियों में रखा है।
कोरोना के डर से जो अमरीका इराक़ से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है उसके कई अन्य आयामों पर भी विशेषज्ञों की नज़र है। कोरोना को इराक़ से सम्मान जनक रूप से निकलने का अवसर बता रहे हैं क्योंकि जिस तरह से इराक़ में विदेशी सैनिकों पर हमले शुरु हो गये हैं उससे बहुत से देश बहुत पहले ही इराक़ से अपने सैनिकों को निकालने की कोशिश में थे लेकिन अमरीका की वजह से खुल कर अपने मन की बात नहीं कह पा रहे थे मगर कोरोना ने उन्हें यह अवसर दे दिया। स्वंय अमरीका को भी जिस तरह से इराक़ से खदेड़ा जा रहा था अगर उसकी वजह से वह इराक़ से निकलने पर मजबूर हो जाता तो उससे उसकी छवि को काफी नुक़सान पहुंचता लेकिन कोरोना की आड़ में वह अपने सैनिकों को बड़ी आसानी से इराक़ से वापस बुला पा रहा है
कोरोना का असर यहां तक है कि अमरीका के रक्षा मंत्री ने कह दिया है कि कोरोना, अमरीकी सैनिकों की लड़ने की क्षमता तक को प्रभावित कर रहा है। इस तरह से हम देख रहे हैं कि कोरोना ने मध्य पूर्व या पश्चिम एशिया में विदेशी सैनिकों की तैनाती की पुरानी बीमारी को जड़ से खत्म करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। यह वह काम है जो अब तक बहुत सैन्य संगठन और बड़े बड़े कूटनैतिक भी नहीं कर पाए मगर इसके साथ ही एक और भी चिंता का पहलु है। अमरीका जिस तरह से छोटी छोटी वापसी के दौरान, इस इलाके के लिए बड़े बड़े फैसले कर रहा है उससे यह आशंका भी सिर उभार रही है कि कहीं वह कोरोना की आड़ में कोई बड़ा क़दम तो नहीं उठाने जा रहा है? कहीं वह दुनिया को कोरोना में फंसा कर, इस इलाक़े और खास तौर पर इराक़ में अपने किसी बड़े उद्देश्य की पूर्ति तो नहीं करना चाह रहा है? अगर एसा हुआ तो निश्चित रूप से एक नया और बहुत बड़ा संकट पैदा होगा जिससे पूरी दुनिया को बहुत बड़ा नुक़सान उठाना पड़ेगा। Q.A.