समाचार पत्र ने लिखा है कि नयी सदी के पहले दो दशकों में डेमोक्रेटिक व्यवस्था पर यह सोच थोप दी गयी कि हर देश की राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था यदि विदेशियों और पलायनकर्ताओं से दूर रहेगी तो उसमें बेहतरी पैदा होगी इसके साथ ही यह सोच भी पनपी कि अपने देश की सीमाओं पर दीवार खड़ी करके और अपने देश को अन्य समाजों विशेषकर उन लोगों से अलग करके जो धर्म और संस्कृति की दृष्टि से अलग हैं, बीमारियों और समस्याओं से स्वंय को अलग रख सकते हैं।
अमरीका में डोनाल्ड ट्रम्प जैसे व्यक्ति का राष्ट्रपति बनना, इस तरह की सोच की चरम सीमा है क्योंकि वह यही सब सोचने वाली हस्ती हैं। इसी तरह ब्रिटेन भी इसी सोच की वजह से युरोपीय संघ से अलग हो गया।
जब कथित डेमोक्रेटिक देशों में हालत यह हो तो फिर तानाशाही पर आधारित व्यवस्था रखने वाले देशों से आशा ही क्या रखी जा सकती है।
हमारा यह मानना है कि कोरोना वायरस दर अस्ल इस लिए आया है ताकि इस प्रकार की नीतियों की सच्चाई हमारे सामने खुल कर आ जाए, जब यह वायरस चीन में फैल रहा था, चीनियों और एशियाई मूल के नागरिकों के खिलाफ पश्चिम में नस्लभेद कई गुना बढ़ गया लेकिन जब वायरस इटली पहुंचा और वहां उसने तबाही मचा दी तो युरोप का नस्लभेद कड़ी परीक्षा से गुज़रने लगा।
युरोप ने इटली की तरफ से मदद की गुहार को अनदेखा ही नहीं किया बल्कि उसका मज़ाक़ भी उड़ाया यहां तक कि युरोप के कई अन्य देश भी कोरोना वायरस की चपेट में आ गये तो फिर अब नस्लभेद की गुंजाइश नहीं बची और युरोप में नस्ल भेद की जगह भय व आतंक ने ले ली, यहां तक कि गोरों को हर प्रकार की आपदा से सुरक्षित समझने वाले अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी अमरीका के लिए युरोप से सभी उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने पर मजबूर हो गये।
यह तो पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि इस हंगामे में बायोलॉजिकल युद्ध की बात की जाए जैसा कि ईरान ने औपचारिक रूप से अमरीका को कोरोना वायरस फैलाने का ज़िम्मेदार बताया है जबकि चीन के एक अधिकारी ने भी अमरीका पर यही आरोप लगाया है जबकि बहरैन और सऊदी अरब ने ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया है।
इस लिए कोरोना वायरस निश्चित रूप से राजनीतिक है। ट्रम्प ने महामारी के लिए विशेष किये गये बजट में कमी कर दी और कोरोना के फैलाव की रोकथाम के लिए बजट बढ़ा दिया है। इसके साथ ही एक हज़ार से अधिक वायरस के अध्ययन के कार्यक्रम को रोकने का आदेश दिया है।
दुनिया की राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक रुझान निश्चित रूप से बायोलॉजिकल युद्ध तक पहुंच सकते हैं और जब तक इस प्रकार के लोग राजनीति के शिखर पर रहेंगे यह युद्ध जारी रहेगा , कोरोना वायरस उसी युद्ध का एक रूप है, आगे और हालात भयानक हो सकते हैं।