चीन की सीमाओं से निकलकर कोविड-19 अब पूरी दुनिया में फैल चुका है और दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान समेत 100 से भी ज़्यादा देशों में हज़ारों लोगों को संक्रमित कर चुका है।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि चीन और अन्य सरकारों द्वारा इस घातक बीमारी पर निंयत्रण के लिए उठाए गए कठोर क़दम, केवल आंशिक रूप से सफल रहे हैं।
वास्तव में हमें किस चीज़ का सामना है? और क्या हम सबसे ख़राब स्थिति के लिए तैयार हैं?
हालांकि जिस वायरस ने दुनिया भर में भय उत्पन्न कर रखा है, वह न ही नया है और न ही अनोखा। कोरोना वायरस परिवार के कई वायरस इंसान को कोई नुक़सान पहुंचाए बिना सदियों से उसके साथ रह रहे हैं।
माइकल फ़ेवरोव कि जो महामारी के एक विश्व-प्रसिद्ध वैज्ञानिक और यूएस सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञ हैं, का कहना है कि हम कम से कम 40 कोरोना वायरस के बारे में जानते हैं।
उनमें से दर्जनों इंसानों के संपर्क में आ सकते हैं और उनमें से अधिकांश "केवल न्यूनतम लक्षण ज़ाहिर करते हैं और कोई ख़तरा उत्पन्न नहीं करते हैं।" इसलिए कि वह मानव शरीर के अनुकूल हैं और शरीर ने उनके मुक़ाबले में रक्षा कवर विकसित कर लिया है। कोरोना वायरस कोविड-19 के साथ समस्या यह है कि यह हाल ही में दूसरी प्रजातियों से इंसानों के संपर्क में आया है और ऐसी अधिक संभावना है कि चमगादड़ से।
सीडीसी विशेषज्ञ ने चेतावनी देते हुए कहाः इस तरह का वायरस क्योंकि मानव शरीर के अनुकूल नहीं है और यह मेज़बान की कोशिकाओं को बुरी तरह से "नष्ट" कर सकता है, जिससे बीमारी अधिक गंभीर रूप ले सकती है और संभावित रूप से जानलेवा परिणाम हो सकते हैं।
दुनिया में एक लाख से अधिक लोगों को संक्रमित करते हुए यह वायरस, 3.5 प्रतिशत मृत्यु दर से लगभग 3,500 लोगों की जान ले चुका है। अगर इसकी तुलना एक सामान्य फ्लू से करें तो उसकी मृत्यु दर लगभग 0.5 प्रतिशत है। फिर भी, चूंकि फ्लू बहुत अधिक संक्रामक है, उसने इसी अवधि में कोरोनो वायरस की तुलना में अधिक लोगों की जान ली है। मिसाल के तौर पर सिर्फ़ अमरीका में इस सीज़न में लगभग 18 हज़ार लोग फ़्लू से मरे हैं।
यह काफ़ी हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि इंसान कहां संक्रमित हुआ है।
फेवरोव का कहना थाः "सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां वायरस से संक्रमित हुए हैं।" उनका कहना है कि विभिन्न देशों में कोरोनो वायरस मृत्यु दर अलग-अलग है। दक्षिण कोरिया में, यह 0.5 प्रतिशत है, जबकि इटली में यह तीन प्रतिशत से भी अधिक है। इसका मतलब है कि एक पहला स्थानीय व्यक्ति चीन में इस वायरस के संपर्क में आया था, जो अभी तक मनुष्यों की सरंचना के अनुकूल नहीं था।