7 मार्च 2020 - 14:10
भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अब क़ानून का नहीं योगी का राज है! सरे-आम लज्जित किए जा रहे प्रदर्शनकारी

विरोध-प्रदर्शन करना किसी भी लोकतांत्रिक देश का मूल अधिकार माना जाता है। इसी विरोध-प्रदर्शन के अधिकार से उस देश की आम जनता में स्वयं के आज़ाद होने का भी एहसास होता है और एक उम्मीद भी होती है कि शायद उनके इस काम से किसी तरह को कोई बदलाव आएगा। लेकिन भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में, जहां अजय सिंह बिष्ट अर्थात योगी आदित्यनाथ की सरकार है वहां विरोध करने पर न केवल सज़ा मिलने लगी है बल्कि सरे-आम प्रदर्शनकारियों को लज्जित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में पिछले वर्ष दिसंबर में मोदी सरकार द्वारा बनाए गए विवादित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ हुए प्रदर्शनों में जिन लोगों के विरुद्ध प्रशासन ने हिंसा के आरोप लगाए थे उनसे हर्जाना वसूलने के लिए योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ में बड़े-बड़े होर्डिंग लगा दिए हैं। वैसे तो विवादित नागरिकता क़ानून पर विवाद इतना गहरा गया है कि उसके नाम पर भारत की राजधानी दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगे हो गए और उनमें 50 से भी अधिक लोग मारे गए। घर, दुकानें, मस्जिदें और न जाने कितने इंसान भी जला दिए गए, लेकिन हालात इतने नाज़ुक हो जाने के बावजूद, सरकारें नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों को परेशान करने से झिझक नहीं रही है। सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करने वालों के ख़िलाफ़ न केवल मुक़द्दमें लिखे जा रहे हैं बल्कि उनक विरुद्ध बल प्रयोग से लेकर जुर्माना लगाने तक की कार्यवाही की जा रही है। लेकिन यहां इस बात को कहना ज़रूरी है कि इतने अत्याचारों और ग़ैर-क़ानूनी कार्यवाहियों के बावजूद प्रदर्शनकारियों के पैर अंगद की तरह डटे हुए हैं और ऐसा लगता है कि उन्होंने भी अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

 

इस बीच उत्तर प्रदेश में दिसंबर में विवादित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों में जिन लोगों के ख़िलाफ प्रशासन ने हिंसा के आरोप लगाए थे उनसे हर्जाना वसूलने के लिए योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ में बड़े-बड़े होर्डिंग लगा दिए हैं। ज़िला प्रशासन और पुलिस द्वारा लगाए गए इन होर्डिंगों पर इन प्रदर्शनकारियों के नाम के साथ साथ उनकी तस्वीरें और उनके पते भी हैं। साथ ही जुर्माने की राशि का भी उल्लेख है और उनके नाम संदेश भी है कि उन्होंने अगर जल्द ही जुर्माना नहीं भरा तो उनकी संपत्ति ज़ब्त कर ली जाएगी। इन प्रदर्शनकारियों की सूची में कुछ जाने माने नाम भी हैं, जैसे पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी, रंगकर्मी दीपक कबीर, वकील मोहम्मद शोएब, समाजिक कार्यकर्ता सदफ जफर, विश्व विख्यात शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे सादिक़ के बेटे डॉक्टर कल्बे सिब्तैन नूरी और मौलाना सैफ़ अब्बास, इनमें से कुछ को पहले हिरासत में लिया गया था और फिर बेल पर रिहा किया गया था। इन सभी को संपत्ति ज़ब्त करने के क़ानूनी नोटिस उनके पतों पर भी भेजे जा चुके हैं।

 

क़ानून के जानकार और भारत की जानी-मानी समाजिक एवं राजनीतिक हस्तियां योगी अदित्यानाथ की इस तरह की कार्यवाही को न केवल ग़ैर-क़ानूनी बता रहे हैं बल्कि उनका कहना है कि भारत की आज़ादी के बाद वर्ष 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंन्द्रा गांधी के समय लगी एमजेंसी के बाद एक बार फिर ऐसा लगने लगा है कि भारत में क़ानून का नहीं बल्कि किसी तानाशाह का राज स्थापित हो गया है। ऐसे सभी लोगों का कहना है कि जिस तरह बिना सबूत बिना वार्ता के लोगों की तस्वीरें शहर के चौराहों पर लगाई जा रही हैं वह बिल्कुल अंग्रेज़ों के समय के शासनकाल की याद दिलाती हैं। वरिष्ठ समाजिक कार्यक्रता सदफ़ जाफ़र का कहना है कि जब मामला अदालत में चल रहा है और वह शहर में ही हैं, उनके वकील भी शहर में ही हैं तो ऐसे में सरकार का यूं सरेआम इस तरह की होर्डिंग लगाना अनैतिक है। दीपक कबीर ने कहा है कि ऐसा करके सरकार लोगों में बदनामी का और आर्थिक दंड का भय पैदा करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि, होर्डिंग पर नाम पता देते हुए प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की निजता का ख्याल भी नहीं रखा है। होर्डिंग पर शिक्षक रोबिन वर्मा की भी तस्वीर है। उनका कहना है कि अगर इस होर्डिंग की वजह से असामाजिक तत्त्व उनके घर पर हमला कर देंगे तो इसके लिए प्रशासन ज़िम्मेदार होगा। जबकि विश्व विख्यात शिया मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक़ के बेटे डॉक्टर कल्बे सिब्तैन नूरी का कहना है कि योगी सरकार इस तरह की कार्यवाही करके हमे डराना चाहती है जबकि हम देश के संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं और उनकी ऐसी कार्यवाहियों से न हम डरेंगे और न ही देश के संविधान की रक्षा के लिए प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारी।

 

इसी तरह योगी की इस कार्यवाही को लेकर न केवल भारतीय मीडिया में चर्चा है बल्कि दुनिया के कई समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में भी इस होर्डिंगों को दिखाया गया है। विदेशी मीडिया लिख रहा है कि भारत में विरोध-प्रदर्शन करने पर सरकारें प्रतिबंध लगा रही हैं और सरकार का विरोध करने वालों से भारी-भरकम जुर्माना वसूला जा रहा है। विदेश में रहने वाले एक टीकाकार का कहना है कि भारती की मोदी और यूपी की योगी सरकार अपने ही देश के नागरिकों से ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे वह किसी आज़ाद देश संवैधानिक पद पर बैठे नेता नहीं बल्कि किसी ग़ुलाम देश में राजा हों। (रविश ज़ैदी)